
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी हाईकमान ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को बदलने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इस बारे में जानकारी दे दी है और राजा वडिंग ने पद छोड़ने की पेशकश की है। हालांकि गुरुवार सुबह तक कांग्रेस की ओर से उनके औपचारिक इस्तीफे या नए अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। पार्टी अगले कुछ दिनों में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर फैसला कर सकती है।
पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला को प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। उनके अलावा परगट सिंह, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, गुरजीत सिंह औजला और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है। पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर नया अध्यक्ष चुन सकता है।
राजा वडिंग वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में लुधियाना संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। इससे पहले अप्रैल 2022 में उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय कांग्रेस को पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा था और पार्टी के अंदर नेतृत्व तथा संगठन को लेकर खींचतान चल रही थी।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद राजा वडिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने की थी। पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव रहे हैं। समय-समय पर नेताओं के सार्वजनिक बयान भी पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर चर्चा पैदा करते रहे। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार यह कहता रहा है कि संगठन एकजुट है और आगामी विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
पिछले कुछ महीनों में पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आई। पार्टी हाईकमान ने 5 सितंबर को पंजाब प्रभारी के तौर पर बड़ा बदलाव करते हुए भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी। इसके बाद सचिन पायलट ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से लगातार मुलाकात कर संगठन की स्थिति का फीडबैक लिया। इसी संगठनात्मक समीक्षा के बाद प्रदेश अध्यक्ष बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस के 50 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत कर पार्टी की स्थिति, गुटबाजी और चुनावी तैयारियों को लेकर जानकारी जुटाई। यह फीडबैक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी सहित वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाया गया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश संगठन में बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
पंजाब में विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने, उम्मीदवारों के चयन, चुनाव अभियान और विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाने की चुनौती है।
विजय इंदर सिंगला का नाम नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए सबसे अधिक चर्चा में है। वह पंजाब सरकार में मंत्री रह चुके हैं और कांग्रेस संगठन में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। हालांकि पार्टी ने उनके नाम पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसके अलावा जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह, राजा सांसी से विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया और अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला के नाम भी संभावित दावेदारों में बताए जा रहे हैं।
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को उस समय और बल मिला जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष बदलने से जुड़े सवाल पर कहा कि राजनीति में परिस्थितियां बदल सकती हैं। हालांकि उन्होंने किसी संभावित नाम या फैसले की पुष्टि नहीं की थी।
राजा वडिंग को कुछ महीने पहले ही प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद पार्टी के भीतर गुटीय मतभेद खत्म नहीं हुए। चरणजीत सिंह चन्नी से जुड़े नेताओं सहित कुछ अन्य नेताओं की ओर से संगठनात्मक बदलाव की मांग की जाती रही थी। हालांकि कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी में किसी तरह की गंभीर टूट या मतभेद से इनकार भी किया।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने अब ऐसा प्रदेश अध्यक्ष चुनने की चुनौती है, जो चुनाव से पहले संगठन के अलग-अलग गुटों के साथ तालमेल बना सके। पंजाब की राजनीति में मालवा, माझा और दोआबा के क्षेत्रीय समीकरणों के साथ सिख, दलित और हिंदू मतदाताओं की सामाजिक भागीदारी भी राजनीतिक दलों की रणनीति का हिस्सा रहती है। इसी कारण नए अध्यक्ष के चयन में क्षेत्रीय और संगठनात्मक संतुलन को लेकर चर्चा चल रही है।
राजा वडिंग ने अप्रैल 2022 में उस समय पंजाब कांग्रेस की कमान संभाली थी, जब पार्टी विधानसभा चुनाव की हार के बाद संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही थी। चार साल से अधिक समय तक प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने कई चुनाव और राजनीतिक अभियान संभाले। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी ने पार्टी के भीतर नई राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। विजय इंदर सिंगला सहित कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं, लेकिन अंतिम फैसला हाईकमान करेगा। राजा वडिंग के औपचारिक इस्तीफे और उनके उत्तराधिकारी की घोषणा के बाद ही पंजाब कांग्रेस की नई संगठनात्मक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।





