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Punjab पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे जगतार सिंह हवारा ने पैरोल के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। अपनी याचिका में हवारा ने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ प्रशासन, जेल महानिदेशक (NCT) और मंडोली सेंट्रल जेल के अधीक्षक ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 6 जुलाई, 2026 के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया है।
उन्होंने कहा कि आदेश में मंडोली सेंट्रल जेल के अधीक्षक को निर्देश दिया गया था कि वे पैरोल देने के उनके अनुरोध को एक सप्ताह के भीतर केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के गृह सचिव को भेजें और अनुरोध मिलने पर, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ चार सप्ताह के भीतर मंडोली की सेंट्रल जेल नंबर 15 के अधीक्षक को अपनी टिप्पणी/सिफारिशें सौंपे। टिप्पणी/सिफारिशें मिलने के बाद, मंडोली सेंट्रल जेल के अधीक्षक को दो सप्ताह के भीतर पैरोल आवेदन पर निर्णय लेना था। उन्होंने कहा कि प्रतिवादी नंबर 4, पंजाब सरकार, पहले ही उन्हें पैरोल पर रिहा करने की सिफारिश कर चुकी है। हालाँकि, अन्य प्रतिवादियों ने निर्देशों का पालन करने में जानबूझकर विफलता दिखाई है और जानबूझकर और इरादतन निर्धारित समय के भीतर उनके पैरोल आवेदन पर निर्णय लेने में विफल रहे हैं।
उनकी जानबूझकर की गई अवज्ञा के लिए एक अलग अवमानना याचिका दायर की जा रही है। कोई अन्य प्रभावी उपाय न होने के कारण, और चूँकि प्रतिवादियों ने स्पष्ट और परोक्ष रूप से उनके पैरोल आवेदनों पर निर्णय लेने से इनकार कर दिया है, इसलिए उन्होंने यह रिट याचिका दायर की है जिसमें अदालत से उन्हें नियमित पैरोल देने और प्रतिवादियों को उन्हें चार सप्ताह के लिए रिहा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। हवारा ने कहा कि वह पहले ही 29 साल और एक महीने से अधिक समय से जेल में हैं। 11 जून, 2025 को उन्होंने मंडोली सेंट्रल जेल के अधीक्षक के समक्ष अपना पहला आवेदन दिया था।
चूँकि अधीक्षक निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन पर निर्णय लेने में विफल रहे, इसलिए उन्होंने चार सप्ताह की नियमित पैरोल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान, दिल्ली के अतिरिक्त स्थायी वकील ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन उनके पैरोल पर निर्णय लेने के लिए उपयुक्त प्राधिकरण है। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रतिवादियों ने जानबूझकर निर्देशों का पालन नहीं किया है और तय समय के भीतर उनकी पैरोल अर्ज़ी पर फ़ैसला लेने में जानबूझकर देरी की है, इसलिए उन्होंने रिट याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें रेगुलर पैरोल दी जाए और प्रतिवादियों को उन्हें चार हफ़्ते के लिए रिहा करने का निर्देश दिया जाए।
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