पंजाब

पराली जलाने पर CAQM सख्त पंजाब के दो जिलों में हाईलेवल टीम का दौरा

Ratna Netam
10 Oct 2026 10:07 PM IST
पराली जलाने पर CAQM सख्त पंजाब के दो जिलों में हाईलेवल टीम का दौरा
x
अमृतसर। पंजाब में धान की कटाई के मौजूदा सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को लेकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) सक्रिय हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले आयोग की एक उच्चस्तरीय टीम ने पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। इस टीम का नेतृत्व आयोग के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस. डी. अत्री ने किया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, दोनों जिलों की पहचान धान की पराली जलाने के हॉटस्पॉट के रूप में की गई है। टीम ने खेतों का निरीक्षण करने के साथ ही अमृतसर में दोनों जिलों के उपायुक्तों और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
धान की कटाई के समय खेतों में बचने वाले फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर हर साल विशेष ध्यान दिया जाता है। पंजाब के कई कृषि क्षेत्रों में धान की कटाई के बाद अगली फसल की तैयारी शुरू होती है। इस दौरान खेतों में बची पराली का निपटान किसानों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है और मौसम संबंधी परिस्थितियों के आधार पर इसका असर आसपास के क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।
अमृतसर और तरनतारन को पराली जलाने का हॉटस्पॉट बताया गया
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पंजाब के अमृतसर और तरनतारन जिलों की पहचान धान की पराली जलाने के हॉटस्पॉट के रूप में की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए CAQM की उच्चस्तरीय टीम ने दोनों जिलों का दौरा किया।टीम ने धान की कटाई के मौजूदा सीजन के दौरान खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरे का संबंध पराली जलाने की समस्या और उससे जुड़े वायु गुणवत्ता प्रबंधन से है।हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक विवरण में दोनों जिलों में पराली जलाने की घटनाओं की वर्तमान संख्या या निरीक्षण के दौरान सामने आए विशिष्ट निष्कर्षों की जानकारी नहीं दी गई है।
डॉ. एस. डी. अत्री के नेतृत्व में पहुंची टीम
CAQM के सदस्य (तकनीकी) डॉ. एस. डी. अत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टीम ने अमृतसर और तरनतारन जिलों का दौरा किया। आयोग की यह पहल धान कटाई के सीजन में पराली प्रबंधन से जुड़ी परिस्थितियों की समीक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।आयोग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन से संबंधित कार्य करता है। पराली जलाने से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों में से एक है। ऐसे में धान की कटाई वाले क्षेत्रों में फसल अवशेष प्रबंधन पर ध्यान देना वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का हिस्सा है।पंजाब में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेषों का प्रबंधन कृषि और पर्यावरण दोनों से जुड़ा विषय है।
दोनों जिलों के उपायुक्तों के साथ हुई समीक्षा बैठक
खेतों के निरीक्षण के अलावा उच्चस्तरीय टीम ने शनिवार को अमृतसर में एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की। इस बैठक में अमृतसर और तरनतारन जिलों के डिप्टी कमिश्नर यानी उपायुक्त तथा जिला स्तर के अन्य अधिकारी शामिल हुए।बैठक में दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी रही। मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी में इस समीक्षा बैठक के आयोजन की पुष्टि की गई है।हालांकि, बैठक में लिए गए विशिष्ट निर्णयों, अधिकारियों को दिए गए निर्देशों या किसी नई कार्ययोजना का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।जिला प्रशासन की भूमिका पराली प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं को स्थानीय स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण होती है। किसानों तक जानकारी पहुंचाना, उपलब्ध संसाधनों का समन्वय करना और खेतों में फसल अवशेषों के निपटान से जुड़े प्रयासों की निगरानी करना प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित प्रमुख पहलू हैं।
धान की कटाई के समय क्यों बढ़ती है पराली की समस्या?
धान की कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल अवशेष बच जाते हैं। कई किसानों को अगली फसल की बुवाई के लिए सीमित समय मिलता है। ऐसे में खेतों को जल्दी खाली करना एक चुनौती बन सकता है।पराली जलाने से खेतों में मौजूद फसल अवशेष कम समय में समाप्त हो जाते हैं, लेकिन इससे धुआं और प्रदूषक तत्व वातावरण में पहुंचते हैं। इनका असर स्थानीय हवा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।फसल अवशेष जलाने से सूक्ष्म कणों सहित विभिन्न वायु प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है। इससे सांस संबंधी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए।पराली जलाने की समस्या का समाधान केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है। यह कृषि पद्धतियों, मशीनों की उपलब्धता, किसानों की लागत और फसल चक्र से भी जुड़ा हुआ है।
पराली प्रबंधन के लिए वैकल्पिक उपाय भी महत्वपूर्ण
धान की पराली को जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के लिए विभिन्न कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। इनमें फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाना, उपयुक्त मशीनों की सहायता से अगली फसल की बुवाई करना और पराली को एकत्र कर अन्य उपयोगों के लिए उपलब्ध कराना शामिल है।हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और अन्य कृषि उपकरण फसल अवशेष प्रबंधन में उपयोगी हो सकते हैं। इन तकनीकों के इस्तेमाल से किसानों को पराली जलाए बिना खेत तैयार करने के विकल्प मिलते हैं।इसके अलावा पराली का उपयोग जैव ऊर्जा और अन्य औद्योगिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है। हालांकि, इन विकल्पों को अपनाने की व्यवहार्यता स्थानीय परिस्थितियों, लागत और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।CAQM की टीम के इस दौरे के संबंध में इन विशेष उपायों पर कोई नया निर्णय लिए जाने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता से भी जुड़ा मुद्दा
पंजाब और आसपास के कृषि क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को लेकर होने वाली चर्चाओं का भी हिस्सा रहती हैं।हालांकि, दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण के कई स्रोत हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां और मौसम संबंधी परिस्थितियां शामिल हैं। पराली जलाने का योगदान अलग-अलग दिनों में बदल सकता है।इसी कारण वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रदूषण स्रोतों पर एक साथ ध्यान देना आवश्यक होता है।
पराली प्रबंधन पर प्रशासनिक समीक्षा का दौर
अमृतसर और तरनतारन जिलों में CAQM की उच्चस्तरीय टीम का दौरा धान कटाई के मौजूदा सीजन में पराली जलाने की समस्या पर ध्यान केंद्रित करता है।डॉ. एस. डी. अत्री के नेतृत्व में टीम ने खेतों का दौरा किया और दोनों जिलों के उपायुक्तों सहित अन्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, अमृतसर और तरनतारन को पराली जलाने के हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। ऐसे में इन जिलों में फसल अवशेष प्रबंधन की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग की टीम ने दोनों जिलों में निरीक्षण और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी की है। आगे किसी विशेष प्रशासनिक निर्णय, नए निर्देश या कार्रवाई का विवरण सामने आने पर ही उसके परिणामों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Next Story