पंजाब

AAP सांसदों पर CM भगवंत मान का बड़ा आरोप, BJP पर भी निशाना

Ratna Netam
25 April 2026 12:56 PM IST
AAP सांसदों पर CM भगवंत मान का बड़ा आरोप, BJP पर भी निशाना
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Punjab.पंजाब: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में एक सार्वजनिक बयान में आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ सांसदों को ‘गद्दार’ करार दिया और आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी पार्टी के विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। इस बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है और चुनावी सरगर्मी के बीच विपक्षी दलों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
CM भगवंत मान ने कहा कि हाल के दिनों में पार्टी के अंदर कुछ सांसद और नेता पार्टी की नीति और दिशा से अलग जाकर निजी लाभ और राजनीतिक अवसर की तलाश में हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे नेताओं के कारण ही पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह सक्रिय रूप से उनके विधायकों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, ताकि पंजाब में राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जा सके।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। AAP के कुछ नेताओं ने CM के बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ सांसदों ने इसे अनुचित और पार्टी की एकता को प्रभावित करने वाला बताया। AAP के वरिष्ठ नेता ने कहा, “पार्टी में मतभेद और विचारों का अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से इस तरह पेश करना संगठन की मजबूती और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती बन सकता है।”
बीजेपी नेताओं ने CM मान के आरोपों पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पार्टी विधायकों और नेताओं से संपर्क को राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देख रही है। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस तरह की बयानबाजी आम है और इससे मतदाताओं पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि CM भगवंत मान का बयान पार्टी के भीतर अनुशासन और एकता बनाए रखने की कोशिश भी हो सकता है। उन्होंने कहा, “ऐसे बयान अक्सर पार्टी नेतृत्व द्वारा संगठन में अनुशासन बनाए रखने और संभावित मतभेदों को नियंत्रित करने के लिए दिए जाते हैं। साथ ही, यह विपक्ष और विरोधी दलों को चेतावनी भी है।”
इस घटना के बाद पंजाब की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। विपक्षी दल इस बयान का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए रणनीति बना रहे हैं, जबकि AAP के अंदर नेताओं और सांसदों के बीच संवाद और स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
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