पंजाब

Brahma Kumaris ने कहा, मितव्ययिता से सामाजिक और आध्यात्मिक लाभ भी

Ratna Netam
11 May 2026 1:14 PM IST
Brahma Kumaris ने कहा, मितव्ययिता से सामाजिक और आध्यात्मिक लाभ भी
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Punjab.पंजाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से मितव्ययिता और खर्च में संयम बरतने की अपील के बाद ब्रह्मा कुमारीज संगठन ने इस पहल पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन ने कहा है कि प्रधानमंत्री की अपील न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो सकती है।
ब्रह्मा कुमारीज के वरिष्ठ प्रतिनिधि ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री की अपील समय की मांग के अनुसार बहुत ही सार्थक है। मितव्ययिता केवल पैसे की बचत का विषय नहीं है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को भी बढ़ावा देती है। संयम और साधारण जीवनशैली अपनाने से व्यक्ति का मन और जीवन अधिक शांत और संतुलित बनता है।”
संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि व्यक्तिगत स्तर पर खर्च में संयम अपनाने के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के लिए भी योगदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कदम जैसे ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण और जिम्मेदार उपभोग, न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी फायदेमंद हैं।
ब्रह्मा कुमारीज ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील को देशवासियों में जागरूकता बढ़ाने वाला कदम बताया। उनके अनुसार, जब नेता इस तरह के संदेश देते हैं, तो यह न केवल आर्थिक अनुशासन को बढ़ावा देता है, बल्कि लोगों में नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होती है।
संगठन के प्रवक्ता ने कहा, “हम इस पहल का स्वागत करते हैं और जनता को यह संदेश देते हैं कि संयम और मितव्ययिता अपनाने से केवल निजी वित्तीय स्थिति मजबूत नहीं होती, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान मिलता है। जब हम अपने संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करते हैं, तो हम एक जिम्मेदार और स्थायी भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाते हैं।”
ब्रह्मा कुमारीज का मानना है कि मितव्ययिता केवल खर्च को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में जिम्मेदारी और संतुलन लाने का साधन हो सकती है। संगठन ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में इस आदत को अपनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से समय की मांग है। भारत में बढ़ती खर्चीली प्रवृत्ति और संसाधनों की सीमितता को देखते हुए मितव्ययिता के संदेश का व्यापक प्रभाव हो सकता है।
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