
Punjab पंजाब: सरकार ने राज्य में प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की ओर से की जा रही अनावश्यक और गैर-वाजिब फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को मंजूरी दे दी है। यह संशोधन मौजूदा पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडिड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016 में बदलाव कर लागू किया जाएगा।
सोमवार को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया। सरकार का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए यह अध्यादेश लाने का फैसला किया गया है।
इस नए प्रावधान के तहत अब प्राइवेट गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को लेकर स्पष्ट नियम और नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर रोक लगाई जा सके। सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों को राहत प्रदान करना है।
कैबिनेट बैठक में केवल शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण फैसलों को भी मंजूरी दी गई। सरकार ने औद्योगिक रियायतों से संबंधित दिशा-निर्देशों में संशोधन करने के लिए स्टेट डाटा इंटीग्रेशन प्लेटफार्म लागू करने पर भी सहमति जताई है। इस कदम से औद्योगिक नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा, जिला होशियारपुर के अंतर्गत आने वाले दसूहा सब-डिवीजन के लिए अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (जनरल) के पद के साथ-साथ सहायक स्टाफ के पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इस निर्णय से स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और जनता तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ आम जनता तक तेजी से पहुंच सकेगा।
कुल मिलाकर, पंजाब कैबिनेट के इन फैसलों को शिक्षा, उद्योग और प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेष रूप से प्राइवेट स्कूलों की फीस पर नियंत्रण से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि अन्य फैसले राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।





