पंजाब

CBI रेड पर बाजवा का हमला मान और केजरीवाल से मांगा जवाब

Ratna Netam
7 Oct 2026 5:46 PM IST
CBI रेड पर बाजवा का हमला मान और केजरीवाल से मांगा जवाब
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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की छापेमारी के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। बुधवार को पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का सामना किया जाना चाहिए। बाजवा का बयान उस कार्रवाई के एक दिन बाद आया, जिसमें CBI ने मान के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर आठ ठिकानों पर तलाशी ली थी।
बाजवा ने आरोप लगाया कि स्थिति यहां तक पहुंचने के लिए भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक को इस संबंध में कई पत्र भेजे थे और यदि राज्य सरकार ने पहले ही आरोपों की जांच कर FIR दर्ज की होती, तो मामला CBI जांच तक नहीं पहुंचता। बाजवा ने दावा किया कि सरकार ने आरोपों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की और अब केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप सामने आए हैं, उनके खिलाफ राज्य स्तर पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब जब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर CBI जांच शुरू हो चुकी है, तो मुख्यमंत्री और उनकी सरकार को जांच में पूरा सहयोग करना चाहिए। बाजवा ने इसे जवाबदेही से जुड़ा मामला बताते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठाए।
CBI ने मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुमन और पांच अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसके बाद चंडीगढ़, मोहाली, संगरूर, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला और जालंधर समेत आठ स्थानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया गया। इनमें मुख्यमंत्री भगवंत मान का चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय और घुमन का आवास भी शामिल था। जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जब्त किए, जिनकी अब जांच की जा रही है।
CBI की FIR पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई। हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री का संज्ञान लेते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों की जांच की जरूरत है। अदालत ने CBI को मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने और दो महीने के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा था। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
CBI के मुताबिक, आरोपों में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरी, टेंडर की शर्तों, लाइसेंस और भूमि उपयोग परिवर्तन जैसे मामलों को कथित तौर पर प्रभावित करने की बात शामिल है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप के बदले आर्थिक लाभ लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों की अभी जांच चल रही है और अदालत या जांच एजेंसी की ओर से किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़ी है। ED ने कथित तौर पर अपनी जांच में ऐसे संपर्क और लेन-देन की जानकारी मिलने का दावा किया था, जिनके आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर सरकारी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए। ED ने अपनी जानकारी पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा की थी। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा और अदालत ने CBI जांच का आदेश दिया।
प्रताप सिंह बाजवा ने इसी क्रम में कहा कि यदि पंजाब पुलिस ने पहले ही शिकायतों पर कार्रवाई की होती, तो सरकार आज इस स्थिति में नहीं होती। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को केंद्रीय एजेंसियों पर आरोप लगाने के बजाय यह बताना चाहिए कि ED की ओर से भेजी गई जानकारी पर क्या कदम उठाए गए थे। बाजवा ने मान सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज किया गया।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। मान ने आरोप लगाया कि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल उनकी सरकार और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब में चुनावी तैयारी के तहत CBI और ED का इस्तेमाल कर रही है।
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी CBI की छापेमारी की आलोचना की है। उन्होंने इसे भाजपा की “बौखलाहट” बताया और आरोप लगाया कि चुनाव से पहले पंजाब सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। AAP ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी जांच से डरने वाली नहीं है।
पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के CBI जांच संबंधी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर कानूनी लड़ाई भी शुरू कर दी है। राज्य सरकार की दलील है कि मामले में CBI जांच का आदेश उचित नहीं है। दूसरी तरफ हाई कोर्ट ने कहा था कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर स्वतंत्र एजेंसी की जांच जरूरी दिखाई देती है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस कानूनी चुनौती पर आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
CBI की इस कार्रवाई ने पंजाब में सत्तारूढ़ AAP और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ा दिया है। कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों पर सरकार से जवाब मांगा है, जबकि AAP इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। ऐसे में जांच का मामला अब कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा भी बन गया है।
फिलहाल CBI की जांच जारी है और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों व दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले में रिश्वत और कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूतों की जांच की जाएगी। दूसरी ओर, पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे चुकी है। जांच के नतीजे और अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेंगे।
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