पंजाब

Amritsar: कांग्रेस नेता रंधावा का पुतला जलाया गया

Payal
3 May 2026 12:21 PM IST
Amritsar: कांग्रेस नेता रंधावा का पुतला जलाया गया
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Punjab.पंजाब: शहर में हाल ही में एक राजनीतिक घटनाक्रम ने सुर्खियाँ बटोरी हैं। 'वारिस पंजाब दे' संगठन के समर्थकों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर रंधावा का पुतला फूंककर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन अमृतपाल सिंह के बारे में रंधावा द्वारा दिए गए बयान को लेकर किया गया।
जानकारी के अनुसार, अमृतसर के विभिन्न हिस्सों से संगठन के समर्थक एकत्रित हुए और उन्होंने हाथों में प्लेकार्ड और बैनर लेकर रंधावा के खिलाफ नारेबाजी की। समर्थकों का कहना था कि रंधावा का बयान अमृतपाल सिंह और उनकी नीतियों के खिलाफ था और इसे संगठन और पंजाब की जनता के हित में उचित नहीं ठहराया जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि इस तरह के बयान सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन पुलिस ने इसे नियंत्रित तरीके से प्रबंधित किया। इस दौरान कई पत्रकारों और नागरिकों ने घटना की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, जिससे यह मुद्दा व्यापक चर्चा में आ गया।
सुखजिंदर रंधावा ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका बयान गलत ढंग से पेश किया गया और उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लेंगे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र में भिन्न मत होना स्वाभाविक है, लेकिन हिंसा या व्यक्तिगत विरोध प्रदर्शन को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
'वारिस पंजाब दे' के नेताओं ने भी अपने समर्थकों को संयम बरतने और कानून के दायरे में रहते हुए विरोध करने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल विरोध जताना है और किसी भी प्रकार की हिंसा को प्रोत्साहित करना नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पंजाब की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की जटिलता को दर्शाती है। पंजाब में राजनीतिक दलों के बीच बयानबाज़ी और प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं का इतिहास पुराना है, और यह घटना उसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिख रही है।
स्थानीय नागरिकों ने इस घटना पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे राजनीतिक असहमति के सामान्य स्वरूप के रूप में देखा, जबकि अन्य ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा और शांति के लिहाज से चिंताजनक माना।
इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल उठाया है कि राजनीतिक नेताओं और संगठनों को अपने बयान देने में कितनी जिम्मेदारी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म पर इस तरह की घटनाओं की व्यापकता बढ़ाने से माहौल और तनावपूर्ण हो सकता है, इसलिए सभी पक्षों को संयम और समझदारी से काम करना आवश्यक है।
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