पंजाब

Muktsar में कथित आगजनी, 56 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख

Ratna Netam
21 April 2026 2:26 PM IST
Muktsar में कथित आगजनी, 56 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख
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Punjab.पंजाब: मुक्तसर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में एक बड़े कथित आगजनी हमले की खबर सामने आई है। स्थानीय किसानों के अनुसार, लगभग 56 एकड़ गेहूं की फसल अचानक आग की चपेट में आ गई और पूरी तरह से नष्ट हो गई। घटना ने न केवल किसानों में चिंता पैदा की है, बल्कि प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया है।
किसानों का कहना है कि आगजनी के पीछे किसी की साजिश हो सकती है, क्योंकि यह अचानक और असामान्य समय पर हुई। उन्होंने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी और अचानक आग लगने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से त्वरित जांच और सहायता की मांग की है।
पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, आग को कथित तौर पर आगजनी की श्रेणी में रखा गया है, और सभी संभावित पहलुओं को खंगाला जा रहा है। अधिकारी फसल के जलने के कारण और आग फैलने के तरीके की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि किसानों को हुए नुकसान की सही मात्रा का आकलन किया जाएगा और सरकार की ओर से राहत पैकेज उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, आगजनी की घटना में शामिल संभावित दोषियों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी गई है।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि गेहूं की फसल में आग लगना पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता और किसानों की आमदनी पर गंभीर असर डाल सकता है। उन्होंने किसानों को आग से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह भी दी।
ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि फसल जलने के पीछे के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल राहत पैकेज से नुकसान की भरपाई नहीं होगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
इस घटना ने मुक्तसर जिले में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय मीडिया और कृषि विभाग भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आगजनी जैसे घटनाओं का मुकाबला केवल प्रशासनिक उपायों से नहीं, बल्कि किसानों के जागरूकता और सुरक्षा उपायों से भी संभव है।
कुल मिलाकर, मुक्तसर जिले में कथित आगजनी हमले ने 56 एकड़ गेहूं की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया। प्रशासन जांच में जुटा हुआ है और किसानों को राहत देने के उपायों पर काम शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना बाकी है कि दोषियों की पहचान और फसल नुकसान की भरपाई कितनी प्रभावी ढंग से की जाती है।
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