पंजाब

मेडिकल लापरवाही का आरोप नवजात की मौत से परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

nidhi
23 Aug 2026 7:39 AM IST
मेडिकल लापरवाही का आरोप नवजात की मौत से परिवार ने उठाए गंभीर सवाल
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लापरवाही का आरोप PGI में बताया बेटा निजी अस्पताल में निकली बेटी
चंडीगढ़ : चंडीगढ़ में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने आरोप लगाया है कि पीजीआई चंडीगढ़ में अल्ट्रासाउंड और इलाज के दौरान उन्हें बच्चे के लड़का होने की जानकारी दी गई, लेकिन निजी अस्पताल में डिलीवरी के बाद नवजात लड़की निकली। इसके बाद नवजात की मौत हो जाने से परिवार ने अस्पतालों की लापरवाही और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें लगातार बच्चे के लिंग को लेकर अलग जानकारी दी गई। परिवार ने बताया कि डिलीवरी के समय निजी अस्पताल में स्थिति सामने आने के बाद वे हैरान रह गए। इसके कुछ समय बाद नवजात की हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिवार ने उठाए जांच पर सवाल
नवजात की मौत के बाद परिवार ने संबंधित अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि अगर शुरुआत में सही जानकारी दी जाती और इलाज में समय पर ध्यान दिया जाता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। परिवार की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से जांच की मांग की गई है। हालांकि मामले में आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
जेंडर जांच को लेकर कानून सख्त
भारत में गर्भ में बच्चे के लिंग की जांच और इसकी जानकारी देना कानूनन अपराध है। प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) एक्ट के तहत भ्रूण के लिंग की पहचान करना या बताना प्रतिबंधित है। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच करता है ताकि इस तरह की अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
नवजात की मौत के बाद बढ़ा विवाद
परिवार ने आरोप लगाया है कि मामले में लापरवाही बरती गई, जिसके कारण नवजात की जान चली गई। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले में जांच और रिकॉर्ड की समीक्षा की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस तरह के मामलों में चिकित्सकीय रिकॉर्ड, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक कारण सामने आते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
परिवार ने दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कदम उठाए जाने चाहिए फिलहाल मामले की जांच का इंतजार है। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जेंडर जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं और नवजात की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
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