पंजाब

बेअदबी कानून संशोधन पर अकाल तख्त का बड़ा आदेश, पंजाब सरकार को 1 महीने का Ultimatum

Gulabi Jagat
29 Jun 2026 4:21 PM IST
बेअदबी कानून संशोधन पर अकाल तख्त का बड़ा आदेश, पंजाब सरकार को 1 महीने का Ultimatum
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Amritsar : अमृतसर में सोमवार को सिख धर्म के सर्वोच्च धार्मिक स्थानों में से एक श्री अकाल तख्त साहिब पर पंजाब सरकार द्वारा पारित “जागृत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026” को लेकर महत्वपूर्ण और विस्तृत सुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई में धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक सभी पक्षों की मौजूदगी रही और पूरे मामले पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।

सुनवाई के अंत में श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से पंजाब सरकार के सिख मंत्रियों, विधायकों तथा विधानसभा अध्यक्ष को एक माह का समय दिया गया है। इस अवधि के भीतर सरकार को कहा गया है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दिए गए सुझावों के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करे और आगे की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे।

सुनवाई में बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की मौजूदगी

इस सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक स्वयं उपस्थित हुए। सभी ने अपने साथ लिखित स्पष्टीकरण भी लाया, जिसे पांच सिंह साहिबानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से अकाल तख्त सचिवालय में शुरू हुई, जहां गुरु साहिब की हजूरी में अरदास भी की गई।

इसके बाद सुनवाई की कार्यवाही शुरू हुई, जिसमें केवल सत्तारूढ़ दल ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे। इनमें कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी उपस्थित थे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार की ओर से पक्ष और प्रस्तुति

सुनवाई के दौरान विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अधिनियम में किन-किन प्रावधानों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि संशोधन की प्रक्रिया को सही दिशा दी जा सके।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार की मंशा नियमों और धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार ही कानून बनाने की रही है, लेकिन स्पष्टता के लिए मार्गदर्शन आवश्यक है।

अकाल तख्त का स्पष्ट रुख

इस पर कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने स्पष्ट कहा कि कानून बनाना सरकार का अधिकार है, लेकिन जब मामला धर्म और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हो तो किसी भी प्रकार के संशोधन या नए प्रावधान जोड़ने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब से परामर्श लेना आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को धार्मिक मामलों में सिख संस्थाओं की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार, धार्मिक मामलों में बिना परामर्श के निर्णय लेने से परंपरागत व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

2008 संशोधन का उल्लेख और बहस

सुनवाई के दौरान वर्ष 2008 में किए गए संशोधन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया। बताया गया कि उस समय शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से प्रस्ताव और राय ली गई थी, जबकि वर्तमान संशोधन प्रक्रिया में ऐसा नहीं किया गया।

इस मुद्दे पर डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि सेलेक्ट कमेटी ने सुझाव लेने की प्रक्रिया के दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था और उनसे अपने सुझाव देने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद इस बार प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस पर चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि धार्मिक मामलों में परामर्श की परंपरा पहले भी रही है और उसी के आधार पर आगे की नीति तय की जाती रही है।

विपक्ष की आपत्तियाँ और सवाल

सुनवाई के दौरान विपक्षी विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस दिन यह विधेयक विधानसभा में पारित हुआ था, उसी दिन उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था कि पहले सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखी जानी चाहिए थी।

उनका कहना था कि सेलेक्ट कमेटी कई महीनों से इस विषय पर काम कर रही थी, इसलिए उसकी सिफारिशों पर पहले चर्चा होना आवश्यक था। उन्होंने यह भी कहा कि बिना उचित चर्चा के निर्णय लेने से प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठते हैं।

धार्मिक प्रक्रिया और अरदास

सुनवाई शुरू होने से पहले अकाल तख्त साहिब सचिवालय में गुरु साहिब की हजूरी में अरदास की गई। इसके बाद पांच सिंह साहिबानों ने कानून में किए गए संशोधनों पर विचार-विमर्श शुरू किया।

पूरी प्रक्रिया धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार संपन्न की गई, जिसमें परंपरा और अनुशासन का पालन किया गया।

तख्तों के जत्थेदारों की उपस्थिति

इस अवसर पर कई प्रमुख धार्मिक हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, श्री हरिमंदिर साहिब के ग्रंथी ज्ञानी बलजीत सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह तथा श्री अकाल तख्त साहिब के पांच प्यारों में से ज्ञानी मंगल सिंह शामिल थे।

इन सभी की मौजूदगी ने इस सुनवाई को धार्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

2008 से वर्तमान तक की तुलना

चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2008 में किए गए संशोधन के समय धार्मिक संस्थाओं से औपचारिक राय ली गई थी, लेकिन इस बार उस प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसी कारण अकाल तख्त साहिब ने सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने यह भी कहा कि खालसा पंथ की सहमति और सिख संस्थाओं से परामर्श के बिना किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इससे धार्मिक व्यवस्था और सरकार के बीच संतुलन प्रभावित हो सकता है।

लाइव प्रसारण और पारदर्शिता

इस पूरी सुनवाई का लाइव प्रसारण भी किया गया, जिससे व्यापक स्तर पर लोगों तक इसकी जानकारी पहुंची। यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हुई और लोग सीधे घटनाक्रम से जुड़ सके।

निष्कर्ष के रूप में तय दिशा

सुनवाई के अंत में स्पष्ट किया गया कि पंजाब सरकार को एक माह के भीतर सभी सुझावों और निर्देशों के आधार पर आवश्यक संशोधन करने होंगे। इसके बाद आगे की प्रक्रिया पर पुनः विचार किया जाएगा।

यह मामला अब केवल कानून निर्माण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक संस्थाओं और सरकार के बीच समन्वय, परामर्श और परंपरा के पालन का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

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