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100 वर्षीय अंगरेज कौर इंसां ने निधन के बाद किया देहदान, मानवता की मिसाल बनीं

nidhi
7 Aug 2026 8:53 AM IST
100 वर्षीय अंगरेज कौर इंसां ने निधन के बाद किया देहदान, मानवता की मिसाल बनीं
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100 वर्षीय अंगरेज कौर इंसां ने जीवन में किए देहदान के वादे को निधन के बाद पूरा किया।

बरनाला : मानवता और समाजसेवा की मिसाल पेश करते हुए 100 वर्षीय अंगरेज कौर इंसां ने अपने जीवन का अंतिम वादा भी निभाया। निधन के बाद उन्होंने देहदान कर चिकित्सा शिक्षा और मानव कल्याण के लिए अपना योगदान दिया। उनके इस फैसले ने परिवार और समाज के सामने सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

अंगरेज कौर इंसां ने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था। उनके निधन के बाद परिजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका पार्थिव शरीर चिकित्सा संस्थान को सौंप दिया।
जीवनभर सेवा की भावना
अंगरेज कौर इंसां का जीवन सेवा और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने अंतिम समय में भी दूसरों के काम आने की इच्छा व्यक्त की थी। देहदान का निर्णय इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मृत्यु के बाद उनके शरीर का उपयोग चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए किया जाए।
परिवार ने किया संकल्प पूरा
निधन के बाद परिवार के सामने भावनात्मक स्थिति थी, लेकिन परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने देहदान की प्रक्रिया पूरी कर उनका शरीर संबंधित चिकित्सा संस्थान को सौंप दिया।
परिवार के इस फैसले की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है।
चिकित्सा शिक्षा में देहदान का महत्व
चिकित्सा छात्रों के प्रशिक्षण में दान किए गए शरीर का महत्वपूर्ण योगदान होता है। मानव शरीर की संरचना को समझने के लिए मेडिकल शिक्षा में कैडेवर अध्ययन आवश्यक माना जाता है। ऐसे में देहदान चिकित्सा शिक्षा और भविष्य के डॉक्टरों के प्रशिक्षण में उपयोगी साबित हो सकता है।
समाज के लिए प्रेरणा
100 वर्ष की उम्र में भी अंगरेज कौर इंसां का यह निर्णय लोगों को मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने की प्रेरणा देता है। देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसी पहल महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सेवा और मानव कल्याण की भावना उम्र की मोहताज नहीं होती।

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