
भुवनेश्वर। बीजू जनता दल ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम 2026 को वापस नहीं लिया गया तो ओडिशा में आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJD नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर अपने आंदोलन को निर्णायक चरण तक ले जाएगी। पार्टी का आरोप है कि संशोधित कानून से खनिज संपदा से जुड़े राज्य के वित्तीय अधिकार प्रभावित होंगे और इससे ओडिशा को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है।
BJD नेताओं ने दावा किया कि संशोधन के बाद खनिज संसाधनों पर राज्यों की वित्तीय शक्तियां सीमित हो सकती हैं। पार्टी का कहना है कि खनिज संपदा ओडिशा की अर्थव्यवस्था और विकास का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इससे जुड़े कर और राजस्व अधिकारों में किसी तरह की कमी राज्य के दीर्घकालीन हितों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि राज्य की भाजपा सरकार और भाजपा नेताओं ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि संशोधन से कर व्यवस्था में समानता और स्पष्टता आएगी।
BJD की आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी से एक दिन पहले पार्टी अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर के लोअर PMG स्क्वायर पर बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा था कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए थे।
पार्टी ने दावा किया कि सोमवार के प्रदर्शन को जनता का व्यापक समर्थन मिला। BJD नेताओं के अनुसार आंदोलन में लोगों की भागीदारी यह दिखाती है कि MMDR संशोधन को लेकर राज्य में नाराजगी है। हालांकि जनता के समर्थन के स्तर को लेकर स्वतंत्र आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और यह BJD का राजनीतिक दावा है।
BJD ने आरोप लगाया कि संशोधित कानून ओडिशा को अपने खनिज संसाधनों से मिलने वाले संभावित राजस्व से वंचित कर सकता है। पार्टी नेताओं ने पहले भी दावा किया था कि राज्य को खनन क्षेत्र से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व पर असर पड़ सकता है। एक पूर्व बयान में BJD नेताओं ने करीब 12 हजार करोड़ रुपये सालाना राजस्व और एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के बकाया कर के संभावित नुकसान का दावा किया था। ये आंकड़े पार्टी के दावे हैं; राज्य सरकार ने कहा है कि संशोधन के वास्तविक राजस्व प्रभाव का विस्तृत आकलन अभी किया जाना बाकी है।
पार्टी ने संशोधन को ओडिशा के आर्थिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि खनिज संपदा से होने वाली कमाई का लाभ राज्य के लोगों, खनन प्रभावित क्षेत्रों और आने वाली पीढ़ियों को मिलना चाहिए। BJD का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्वायत्तता कमजोर होने से विकास योजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है।
नवीन पटनायक इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने राज्य विधानसभा से संशोधन के खिलाफ सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने की भी मांग की थी।
BJD का कहना है कि MMDR संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राज्य के सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर ओडिशा के हितों की रक्षा करनी चाहिए। पार्टी ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के अधिकार और भविष्य से जुड़ा विषय बताया है।
इससे पहले भी BJD ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की थी। पार्टी नेताओं ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर खनन गतिविधियों और खनिज परिवहन को रोकने तक का कदम उठाया जा सकता है। आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी इसी व्यापक आंदोलन रणनीति का हिस्सा बताई जा रही है।
दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने BJD के आरोपों को भ्रामक बताया है। भाजपा का कहना है कि संशोधन राज्य के मौजूदा रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन से मिलने वाले राजस्व को समाप्त नहीं करता। भाजपा नेताओं ने यह भी दावा किया है कि एक समान और स्पष्ट कर ढांचा निवेश आकर्षित करने और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगा।
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि आर्थिक नाकेबंदी से अंततः ओडिशा की अर्थव्यवस्था और आम लोगों को नुकसान हो सकता है। पार्टी ने BJD पर इस मुद्दे को राजनीतिक रूप देने का आरोप लगाया है।
MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर ओडिशा विधानसभा में भी हाल के दिनों में काफी हंगामा हुआ है। BJD और कांग्रेस दोनों ने सदन में कानून का विरोध किया और इसे वापस लेने की मांग की। लगातार विरोध और नारेबाजी के कारण विधानसभा की कार्यवाही भी कई बार बाधित हुई।
BJD का तर्क है कि खनिज संपदा वाले राज्यों को इससे जुड़े कर और राजस्व संबंधी फैसलों में पर्याप्त अधिकार मिलना चाहिए। पार्टी विशेष रूप से उस प्रावधान का विरोध कर रही है जिसके बारे में उसका कहना है कि इससे खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर राज्य की कर लगाने की क्षमता सीमित होगी।
पार्टी ने युवाओं के भविष्य का मुद्दा भी उठाया है। BJD नेताओं का कहना है कि यदि खनिज संपदा से होने वाली आय कम हुई तो राज्य की विकास क्षमता प्रभावित होगी और इसका असर रोजगार, आधारभूत ढांचे तथा कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। यह BJD की राजनीतिक व्याख्या है, जबकि संशोधन के वास्तविक दीर्घकालिक प्रभाव पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।
सोमवार को लोअर PMG में आयोजित प्रदर्शन में नवीन पटनायक ने कहा था कि पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से कानून वापस लेने की मांग दोहराई।
मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJD नेताओं ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी अब केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। यदि केंद्र ने मांग नहीं मानी तो आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम पर आगे बढ़ा जाएगा।
फिलहाल MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर ओडिशा की राजनीति में टकराव तेज हो गया है। एक ओर BJD इसे राज्य के वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों का सवाल बता रही है, वहीं भाजपा इन दावों को खारिज कर संशोधन को खनन नीति में स्थिरता और एकरूपता लाने वाला कदम बता रही है।
अब निगाह इस बात पर है कि BJD अपनी घोषित आर्थिक नाकेबंदी की रणनीति को किस रूप में आगे बढ़ाती है और केंद्र तथा राज्य सरकार इस बढ़ते राजनीतिक दबाव पर क्या रुख अपनाती हैं।





