ओडिशा

MMDR संशोधन और मतदाता सूची विवाद पर INDI गठबंधन का 8 अक्टूबर को ओडिशा बंद का ऐलान

Kavita2
29 Sept 2026 5:16 PM IST
MMDR संशोधन और मतदाता सूची विवाद पर INDI गठबंधन का 8 अक्टूबर को ओडिशा बंद का ऐलान
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भुवनेश्वर। ओडिशा में विपक्षी INDI गठबंधन ने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम 2026, मतदाता सूची में कथित एकतरफा बदलाव और स्कूल पाठ्यपुस्तकों से जुड़े विवाद को लेकर 8 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित ‘परिवर्तन रैली’ के दौरान इसकी घोषणा की।

दास ने कहा कि गठबंधन की प्रमुख मांगों में MMDR संशोधन अधिनियम को वापस लेना, स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर कार्रवाई शामिल है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

परिवर्तन रैली के दौरान कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार और केंद्र की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इससे पहले गठबंधन ने 29 सितंबर को विधानसभा के घेराव का कार्यक्रम तय किया था। विधानसभा का मानसून सत्र समय से पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद विरोध प्रदर्शन का केंद्र बदलकर राजधानी के अन्य हिस्सों में किया गया।

भक्त चरण दास ने कहा कि 8 अक्टूबर का बंद राज्यव्यापी होगा और गठबंधन इसके जरिए अपनी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखेगा। उन्होंने सहयोगी दलों और समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने इस बंद को MMDR कानून, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े विवाद और स्कूल की किताबों में कथित त्रुटियों से जोड़कर देखा है।

MMDR संशोधन अधिनियम 2026 पिछले कुछ दिनों से ओडिशा की राजनीति का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कांग्रेस और बीजू जनता दल दोनों इस कानून का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि संशोधित प्रावधान राज्य के खनिज संसाधनों और उनसे मिलने वाले राजस्व से जुड़े अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। सत्तारूढ़ भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है।

ओडिशा विधानसभा के हालिया मानसून सत्र में भी MMDR संशोधन अधिनियम को लेकर लगातार हंगामा हुआ था। कांग्रेस और बीजद के सदस्यों ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए संशोधन वापस लेने की मांग की। विरोध के कारण विधानसभा की कार्यवाही लगातार कई दिनों तक प्रभावित हुई।

कांग्रेस का कहना है कि ओडिशा के खनिज संसाधनों और उनसे मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के हित में इस्तेमाल होना चाहिए। अगस्त में INDI गठबंधन के घटक दलों की बैठक में भी MMDR संशोधन के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद अलग-अलग जिलों में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

दूसरा बड़ा मुद्दा मतदाता सूची में कथित बदलाव का है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भी हाल में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण की दोबारा समीक्षा की मांग की थी। चुनाव आयोग और भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों का खंडन किया गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं। इन आरोपों को चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में बंद के दौरान विपक्ष इस मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।

स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा भी INDI गठबंधन की प्रमुख मांगों में शामिल है। ओडिशा में सरकारी स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक विवाद चल रहा है। कांग्रेस और बीजद दोनों ने मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

सत्तारूढ़ भाजपा ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा है कि पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों पर सरकार ने सुधारात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप भी लगाया है।

मंगलवार की रैली में भक्त चरण दास ने कहा कि आंदोलन को केवल राजधानी तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों में भी विरोध कार्यक्रम जारी रहेंगे।

MMDR संशोधन को लेकर बीजद भी समानांतर आंदोलन चला रहा है। सोमवार को पार्टी अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर में बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित कानून से राज्य को खनिज क्षेत्र में वित्तीय नुकसान हो सकता है। भाजपा ने इस दावे को खारिज किया है।

इन घटनाक्रमों के कारण ओडिशा में खनिज नीति, मतदाता सूची और शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दे एक साथ राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इन मुद्दों को जोड़कर 8 अक्टूबर के बंद को व्यापक आंदोलन का रूप देने की तैयारी में हैं।

भक्त चरण दास ने स्पष्ट किया कि बंद के जरिए राज्य और केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। उन्होंने गठबंधन के सभी घटक दलों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है।

फिलहाल 8 अक्टूबर के प्रस्तावित ओडिशा बंद को लेकर विपक्ष ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बंद के स्वरूप, आवश्यक सेवाओं और परिवहन को लेकर विस्तृत व्यवस्था आगे स्पष्ट होने की उम्मीद है। विपक्ष ने साफ किया है कि MMDR संशोधन, मतदाता सूची से जुड़े विवाद और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उसका आंदोलन जारी रहेगा।

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