ओडिशा
पाली भाषा के संरक्षण को नई ताकत ओडिशा में बनेगा विशेष केंद्र
Ratna Netam
3 Oct 2026 5:07 PM IST

x
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा में 'क्लासिकल पाली' के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से मिली मंजूरी का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले को ओडिशा के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि इससे भारत की समृद्ध भाषाई विरासत के संरक्षण के साथ पाली भाषा के अध्ययन, शोध और प्रचार-प्रसार को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि क्लासिकल पाली के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मंजूरी भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे पाली भाषा से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाली भाषा भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे में इसके लिए एक समर्पित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होने से भाषा के व्यवस्थित अध्ययन और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा और इस पहल से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।
पाली भाषा का भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में विशेष स्थान माना जाता है। यह बौद्ध साहित्य और दर्शन से गहराई से जुड़ी भाषा है। बौद्ध धर्म की महत्वपूर्ण शिक्षाओं और साहित्य का बड़ा हिस्सा पाली से संबंधित है। यही कारण है कि पाली के अध्ययन को केवल भाषा के अध्ययन के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय दर्शन, इतिहास और आध्यात्मिक परंपराओं को समझने के माध्यम के रूप में भी देखा जाता है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से पाली भाषा पर अकादमिक शोध के लिए एक विशेष संस्थागत मंच तैयार होगा। यहां विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पाली के साहित्य, व्याकरण, इतिहास और उससे जुड़ी ज्ञान परंपराओं पर अध्ययन करने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही देश और विदेश में पाली पर काम करने वाले विद्वानों के बीच अकादमिक सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
केंद्र का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पाली से जुड़ी विरासत का संरक्षण भी होगा। पुरानी भाषाओं से संबंधित ग्रंथों, पांडुलिपियों और दूसरी ऐतिहासिक सामग्री को समय के साथ सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। आधुनिक तकनीक और डिजिटलीकरण की मदद से ऐसी सामग्री को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकता है। इससे शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सामग्री तक पहुंच आसान होने की भी संभावना है।
मुख्यमंत्री माझी ने इस फैसले को ओडिशा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया क्योंकि इससे भारत के सभ्यतागत ज्ञान और भाषाई विरासत को संरक्षित करने में राज्य की भूमिका और मजबूत होगी। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा में यह केंद्र स्थापित होने से राज्य शास्त्रीय भाषाओं से जुड़े शोध और अध्ययन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान को आगे बढ़ा सकेगा।
पाली भाषा का संबंध केवल धार्मिक साहित्य तक सीमित नहीं है। इसके अध्ययन के माध्यम से प्राचीन भारत की सामाजिक व्यवस्था, विचार परंपरा, दर्शन और सांस्कृतिक विकास के कई पहलुओं को समझने में मदद मिलती है। इसी वजह से पाली भाषा के संरक्षण और इसके अध्ययन को बढ़ावा देने की मांग लंबे समय से अकादमिक जगत में की जाती रही है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से भाषा को आधुनिक शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। शोध परियोजनाओं, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और अकादमिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों और विद्वानों को इस क्षेत्र से जोड़ा जा सकता है। इससे पाली के अध्ययन का दायरा पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ सकता है।
पाली भाषा से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री का डिजिटलीकरण भी इस पहल का अहम हिस्सा हो सकता है। डिजिटल संग्रह तैयार होने से दुर्लभ सामग्री को सुरक्षित रखने के साथ उसे अधिक लोगों तक पहुंचाना आसान होगा। शोधार्थी भौगोलिक दूरी की बाधा के बिना ऐसी सामग्री का अध्ययन कर सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अकादमिक संवाद को बढ़ावा मिल सकता है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए पाली भाषा और बौद्ध अध्ययन के बीच अकादमिक संबंधों को भी विस्तार मिलने की संभावना है। भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में बौद्ध दर्शन और पाली साहित्य का अध्ययन किया जाता है। ऐसे में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा में बनने वाला केंद्र भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग के अवसर तैयार कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से भारत की भाषाई विविधता और विरासत के संरक्षण पर जोर दिया। भारत में अनेक प्राचीन भाषाओं ने सदियों से साहित्य, दर्शन और ज्ञान परंपराओं को आगे बढ़ाया है। इन भाषाओं को संरक्षित करना केवल अतीत की विरासत बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें मौजूद ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने से भी जुड़ा है।
ओडिशा स्वयं अपनी प्राचीन संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और बौद्ध स्थलों के लिए जाना जाता है। राज्य में बौद्ध विरासत से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल मौजूद हैं। ऐसे में क्लासिकल पाली के अध्ययन के लिए एक समर्पित केंद्र की स्थापना से राज्य में भाषा, इतिहास और बौद्ध विरासत से जुड़े अध्ययन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री माझी ने इस उपलब्धि के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल पाली भाषा के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार को मजबूत करेगी। उन्होंने इस दिशा में प्रयास करने वाले सभी लोगों के योगदान की भी सराहना की।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा में क्लासिकल पाली के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मंजूरी को भाषा संरक्षण के साथ अकादमिक शोध को बढ़ावा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री माझी के अनुसार, यह पहल ओडिशा को भारत की सभ्यतागत ज्ञान परंपरा और समृद्ध भाषाई विरासत के संरक्षण में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देगी।
Next Story





