ओडिशा
पाली भाषा के संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा ओडिशा में खुलेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
Ratna Netam
3 Oct 2026 4:47 PM IST

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भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय विश्वविद्यालय, ओडिशा में क्लासिकल पाली के अध्ययन के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' (CoE) स्थापित करने की केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की मंजूरी का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इसे ओडिशा के लिए गर्व का क्षण और भारत की समृद्ध भाषाई, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। केंद्र का उद्देश्य पाली भाषा के अध्ययन, शोध, संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रचार-प्रसार को मजबूत करना है।
शिक्षा मंत्रालय ने क्लासिकल असमिया, बंगाली, मराठी, पाली और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए देश के अलग-अलग उच्च शिक्षण संस्थानों में पांच नए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' स्थापित करने की मंजूरी दी है। मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के भाषा प्रभाग ने एक अक्टूबर को इस संबंध में कार्यालय ज्ञापन जारी किया।
योजना के तहत क्लासिकल असमिया के लिए असम के तेजपुर विश्वविद्यालय, क्लासिकल बंगाली के लिए पश्चिम बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय, क्लासिकल मराठी के लिए पुणे के डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, क्लासिकल पाली के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा और क्लासिकल प्राकृत के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा।
इन केंद्रों के जरिए संबंधित शास्त्रीय भाषाओं पर उच्च स्तरीय अकादमिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ उनकी प्राचीन विरासत को डिजिटल रूप में संरक्षित करने पर जोर दिया जाएगा। मंत्रालय की योजना इन भाषाओं से जुड़े साहित्य, दस्तावेजों और ज्ञान परंपराओं के संरक्षण तथा उनके व्यापक प्रसार को मजबूत करने की है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा में क्लासिकल पाली के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इससे पाली भाषा के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पाली भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी भाषा है। उन्होंने कहा कि नया केंद्र भारत की भाषाई विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में ओडिशा के योगदान को भी मजबूत करेगा। माझी ने केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा और इस पहल से जुड़े लोगों को बधाई भी दी।
पाली भाषा का विशेष महत्व बौद्ध साहित्य और दर्शन के अध्ययन में भी माना जाता है। प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित बड़ी मात्रा में साहित्य पाली से जुड़ा हुआ है। ऐसे में एक समर्पित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने से भाषा पर व्यवस्थित शोध और अध्ययन के लिए संस्थागत मंच मिलने की उम्मीद है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पाली से जुड़े अकादमिक अध्ययन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा। पुराने ग्रंथों और उपलब्ध सामग्री का डिजिटलीकरण होने से शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उन्हें सुरक्षित रखने और अध्ययन करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डिजिटल माध्यम से ऐसी सामग्री को देश और विदेश में शोध कर रहे विद्वानों तक पहुंचाना भी आसान हो सकता है।
इस फैसले की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार द्वारा भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था। इसके बाद इन भाषाओं के अध्ययन और संरक्षण के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए गए।
शिक्षा मंत्रालय पहले से तमिल, तेलुगु, ओडिया, मलयालम, संस्कृत और कन्नड़ जैसी शास्त्रीय भाषाओं के लिए भी संस्थागत स्तर पर अध्ययन और संरक्षण को प्रोत्साहित करता रहा है। अब पांच नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मंजूरी के बाद शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त नई भाषाओं के लिए भी शोध का समर्पित ढांचा तैयार होगा।
केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा में स्थापित होने वाला केंद्र पाली भाषा से जुड़े विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण मंच बन सकता है। यहां भाषा के इतिहास, व्याकरण, प्राचीन साहित्य, बौद्ध दर्शन और उससे जुड़ी ज्ञान परंपराओं पर शोध को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इसके साथ ही विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं के बीच अकादमिक सहयोग को भी विस्तार मिल सकता है।
पाली से जुड़े पुराने ग्रंथों और पांडुलिपियों का संरक्षण भी इस पहल का अहम पक्ष होगा। समय के साथ पुरानी सामग्री को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में डिजिटलीकरण के जरिए महत्वपूर्ण ग्रंथों और दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां तैयार कर उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सकता है।
नई पहल केवल भाषा के संरक्षण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य शास्त्रीय भाषाओं में मौजूद ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। आधुनिक शोध पद्धतियों और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से इन भाषाओं के अध्ययन का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
मुख्यमंत्री माझी ने इस पहल को ओडिशा की भूमिका से भी जोड़ा है। उनका कहना है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होने से भारत की सभ्यतागत ज्ञान परंपरा और भाषाई विरासत के संरक्षण में राज्य का योगदान और मजबूत होगा।
केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा में क्लासिकल पाली के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मिली मंजूरी के बाद अब इसके माध्यम से शोध, संरक्षण, डिजिटलीकरण और अकादमिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने की राह खुल गई है। पांच शास्त्रीय भाषाओं के लिए एक साथ केंद्र स्थापित करने का फैसला भारत की प्राचीन भाषाई विरासत को आधुनिक शैक्षणिक और तकनीकी संसाधनों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
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