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ओड़िशा न्यूज
दो साल बाद भक्तों के समागम के बीच 14 जून को स्नान पूर्णिमा नीति सम्पन्न की जा रही है। महाप्रभु हाथी वेश में भक्तों को दर्शन देंगे। इस वेश को देखने के लिए भक्तों को स्नानवेदी पर तीन घंटे का समय मिलेगा। हालांकि किसी भी भक्त को महाप्रभु को स्पर्श करने की अनुमति नहीं है। इस संदर्भ में गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई संचालन कमेटी की बैठक यह निर्णय लिया गया है। बैठक में मुख्य रूप से देव स्नान पूर्णिमा, रथयात्रा, बाहुड़ा यात्रा, सोनावेश, नीलाद्री बिजे को शांति पूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए चर्चा हुई है। यहां उल्लेखनीय है कि 14 जून को होने वाली महाप्रभु की देव स्नान पूर्णिमा के लिए श्रीमंदिर एवं पुलिस प्रशासन की तरफ से व्यापक तैयारी की जा रही है।
मंदिर संचालन कमेटी की बैठक में राजेन्द्राभिषेक से लेकर नीलाद्री बिजे तक सभी नीति को सब कमेटी ने तैयार किया है, जिसे पर संचालन कमेटी ने अपनी मुहर लगा दी है। स्नान पूर्णिमा के दिन मंगलार्पण, डोरलागी, पुष्पांजलि के बाद पहंडी बिजे शुरू होगी। 14 जून को भोर 4 बजे से पहंडी बिजे शुरू होगी जो कि 6 बजे तक चलेगी। सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक जल बिजे एवं पूजा नीति सम्पन्न की जाएगी। इसके 12 बजकर 15 मिनट पर छेरा पहंरा तथा 12:30 से 2:30 बजे तक हाथी वेश सम्पन्न होगा। सुबह के समय पारिमाणिक टिकट लेकर भक्तों को दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है।
सेवकों को सलाह
महाप्रभु जगन्नाथ जी स्नान यात्रा में जल लागी नीति को अनुशासित ढंग से सम्पन्न कराने एवं हाथी वेश के दौरान अनुशासन बनाए रखने के लिए सेवकों को सलाह दी गई है। इस दौरान कोई सेवक श्री विग्रह के सामने खड़ा ना होने पाए क्योंकि इससे भक्तों को दर्शन करने में परेशानी होगी, इसके लिए सेवकों को सलाह दी गई है। स्नान मंडप में सीसीटीवी एवं बीडीओ रिकार्डिंग की व्यवस्था की जाएगी। सभी सेवकों के साथ समन्वय बनाकर रीति नीति सम्पन्न करने के लिए सेवकों को बैठक में सलाह दी गई है।
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