
Odisha ओडिशा: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को कहा कि राज्य ने आपदा प्रबंधन के लिए एक मजबूत और प्रभावी प्रणाली विकसित की है, जिसे और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों को लगातार बेहतर बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने यह बयान भुवनेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय प्राकृतिक आपदा समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिया। बैठक में राज्य में आपदा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था, उसकी तैयारी और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि आने वाले समय में अल-नीनो के संभावित प्रभावों से राज्य कैसे निपटेगा। अल-नीनो के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव की आशंका जताई गई है, जिसका सीधा असर खरीफ सीजन की खेती पर पड़ सकता है।
बैठक में कृषि, सिंचाई और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान यह माना गया कि अल-नीनो की स्थिति में बारिश का वितरण असमान हो सकता है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सभी विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी स्थितियों से निपटने के लिए "सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने के तरीके" (whole-of-government approach) को अपनाना जरूरी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि वह अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक आकस्मिक योजना (contingency plan) तैयार करे। इस योजना में यह सुनिश्चित किया जाए कि कृषि क्षेत्र पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके और किसानों को समय पर सहायता मिल सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में मौसम और कृषि से जुड़ी स्थितियों पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया गया है, जो बारिश की स्थिति, जलस्तर, फसल योजना और बीज तथा खाद की आपूर्ति पर नियमित रूप से निगरानी रखेगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस निगरानी प्रणाली का उद्देश्य समय रहते संभावित संकट की पहचान करना और आवश्यक कदम उठाना है, ताकि किसानों और आम जनता पर आपदा का असर कम से कम पड़े।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पैटर्न में तेजी से बदलाव हो रहा है, जिससे आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक आधुनिक और सक्रिय बनाने की जरूरत बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को केवल प्रतिक्रिया प्रणाली के रूप में नहीं देख रही है, बल्कि इसे एक सक्रिय और पूर्व-तैयारी आधारित व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों को भी बढ़ाया जाए, ताकि किसान समय रहते मौसम की परिस्थितियों के अनुसार अपनी फसलों की योजना बदल सकें।
इस दौरान यह भी बताया गया कि राज्य सरकार विभिन्न विभागों के बीच डेटा साझा करने और समन्वय बढ़ाने पर काम कर रही है, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओडिशा जैसे तटीय राज्य के लिए आपदा प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां हर साल चक्रवात, बाढ़ और असमान वर्षा जैसी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल राज्य की सुरक्षा और कृषि स्थिरता के लिए अहम मानी जा रही है।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी तैयारियों की नियमित समीक्षा करें और किसी भी स्थिति में लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि आपदा से निपटने के लिए त्वरित निर्णय और समन्वित कार्रवाई ही सबसे प्रभावी उपाय है।





