
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने खनन गतिविधियों से प्रभावित जिलों के बीच डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के समान और पारदर्शी वितरण के लिए एक नया सिस्टम लागू किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खनन से मिलने वाले संसाधनों का लाभ उन क्षेत्रों तक उचित तरीके से पहुंचे, जो सीधे या परोक्ष रूप से खनन गतिविधियों से प्रभावित हैं।
राज्य सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, DMF फंड का उपयोग केवल उन्हीं क्षेत्रों में किया जाएगा जो संबंधित खदान से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। इसके लिए सरकार ने स्पष्ट रूप से 70:30 का अनुपात तय किया है, जिसके तहत 70 प्रतिशत फंड सीधे प्रभावित क्षेत्रों और 30 प्रतिशत फंड अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा।
नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि खदान की सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को सीधे प्रभावित माना जाएगा। वहीं, 15 किलोमीटर से 25 किलोमीटर के बीच स्थित क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि DMF फंड का उपयोग खदान से 25 किलोमीटर के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकेगा।
यह नया नियम उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहां किसी खदान का प्रभाव एक से अधिक जिलों में फैलता है। ऐसे मामलों में, DMF फंड का वितरण प्रत्येक जिले में आने वाले प्रभावित क्षेत्रों के अनुपात के आधार पर किया जाएगा, ताकि न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित हो सके।
सरकार के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य माइनिंग से प्रभावित समुदायों को अधिक लाभ पहुंचाना और विकास कार्यों में पारदर्शिता लाना है। इससे स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़े कार्यों को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।
नए फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए डायरेक्टर ऑफ माइंस एंड जियोलॉजी को ओडिशा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (ORSAC) के साथ मिलकर भौगोलिक डेटा एकत्र करने और खनन प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है। तैयार की गई रिपोर्ट संबंधित जिला कलेक्टरों को भेजी जाएगी, ताकि फंड का सही तरीके से उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
इस पहल को खनन प्रभावित क्षेत्रों के संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल संसाधनों का न्यायसंगत वितरण होगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।





