
नुआपाड़ा। ओडिशा के नुआपाड़ा शहर में रविवार रात चोरी की बड़ी घटना सामने आई है। चोरों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-353 के किनारे स्थित एक घर को निशाना बनाया और कथित तौर पर नकदी, साड़ियां, चांदी के सामान तथा चांदी के सिक्के लेकर फरार हो गए। चोरी हुए सामान की कीमत करीब 20 लाख रुपये बताई जा रही है। घटना की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि यह मकान नुआपाड़ा के पुलिस अधीक्षक अमृतपाल सिंह के सरकारी आवास के पास स्थित है।
जिस घर में चोरी हुई वह सेवानिवृत्त प्रोफेसर किशोर कुमार बारिक और शिक्षिका स्वर्णलता झंकार का बताया गया है। रविवार रात अज्ञात चोरों ने उनके मकान में प्रवेश किया और घर के अंदर रखे कीमती सामान को खंगाला। बताया जा रहा है कि वारदात के दौरान चोरों ने साड़ियों के साथ नकदी और चांदी से बनी कई वस्तुएं चोरी कर लीं। इनमें चांदी के सिक्के भी शामिल बताए गए हैं।
सोमवार सुबह परिवार के सदस्यों को घर में चोरी होने का पता चला। कमरे और सामान अस्त-व्यस्त मिलने पर उन्होंने घर की जांच की। कीमती वस्तुएं और नकदी नहीं मिलने के बाद घटना की सूचना नुआपाड़ा पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस ने घर के अलग-अलग हिस्सों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि चोर किस रास्ते से मकान में घुसे और वारदात को अंजाम देने के बाद किस दिशा में फरार हुए। घर के दरवाजों, खिड़कियों और आसपास के स्थानों की भी जांच की गई। घटना से जुड़े सुराग जुटाने के लिए स्थानीय लोगों से जानकारी ली जा रही है।
चोरी की यह घटना शहर के ऐसे इलाके में हुई है जहां पुलिस अधीक्षक का सरकारी आवास भी मौजूद है। इसलिए वारदात के बाद स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि उच्च पुलिस अधिकारी के आवास के पास चोर इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं तो शहर के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-353 के किनारे स्थित होने के कारण इस इलाके में दिन-रात वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद चोरों के घर में घुसने और बड़ी मात्रा में सामान लेकर भागने की घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने वारदात से पहले घर और आसपास के इलाके की रेकी की थी या उन्हें घर में रखे सामान की पहले से जानकारी थी।
चोरी में कितने लोग शामिल थे, फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यह भी जांच का विषय है कि घटना के समय घर में कोई मौजूद था या मकान खाली था। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल सकती है। राजमार्ग और आसपास के रास्तों पर लगे कैमरों से संदिग्ध व्यक्तियों या वाहनों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परिवार की ओर से दी गई शुरुआती जानकारी के आधार पर चोरी हुए सामान की सूची तैयार की जा रही है। कथित तौर पर गायब नकदी, चांदी के सिक्कों और अन्य वस्तुओं की वास्तविक कीमत का पता विस्तृत आकलन के बाद ही चलेगा। लगभग 20 लाख रुपये के नुकसान का आंकड़ा शुरुआती जानकारी पर आधारित बताया जा रहा है। पुलिस सत्यापन के बाद ही चोरी की कुल कीमत की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
पुलिस स्थानीय सराफा कारोबारियों और संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रख सकती है ताकि चोरी का सामान बाजार में बेचने की किसी कोशिश का पता लगाया जा सके। ऐसे मामलों में चांदी के सामान को गलाने या दूसरे क्षेत्रों में बेचने की आशंका रहती है। इसलिए पड़ोसी जिलों और थाना क्षेत्रों के साथ सूचनाएं साझा किए जाने की संभावना है।
घटना के बाद आसपास के लोगों में भय का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने रात्रि गश्त बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि शहर के मुख्य मार्गों और आवासीय क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। बंद पड़े कैमरों को ठीक कराने और प्रमुख प्रवेश मार्गों पर निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी जताई गई है।
सेवानिवृत्त प्रोफेसर और शिक्षिका के घर हुई चोरी ने अपराधियों के हौसले को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है। चोरों ने कथित रूप से घर के भीतर मौजूद अलमारियों और अन्य सुरक्षित स्थानों को निशाना बनाया। इससे संभावना जताई जा रही है कि उन्होंने व्यवस्थित तरीके से घर की तलाशी ली होगी। हालांकि वारदात के तरीके को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी मिलना बाकी है।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में कोई संदिग्ध व्यक्ति घूमता देखा गया था या नहीं। घर के आसपास रहने वाले लोगों, दुकानदारों, वाहन चालकों और रात में ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की जा सकती है। मोबाइल फोन की तकनीकी जानकारी और इलाके में सक्रिय संदिग्ध नंबरों की जांच से भी आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। चोरी में शामिल लोगों की पहचान अथवा किसी संदिग्ध को हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस के लिए आरोपियों को जल्द पकड़ना और चोरी हुआ सामान बरामद करना बड़ी चुनौती है। वहीं परिवार को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से वारदात का खुलासा होगा और उनकी कीमती वस्तुएं वापस मिल सकेंगी।





