
भुवनेश्वर। ओडिशा के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुखद खबर सामने आई है। पहली बार मां बनी शेरनी माया द्वारा जन्म दिए गए दोनों नवजात शावकों की मौत हो गई है। इनमें से एक शावक जन्म के समय ही मृत पाया गया था जबकि दूसरा नर शावक तीन दिन तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद दम तोड़ गया। दूसरे शावक के पोस्टमार्टम में जन्मजात विकृति सामने आने की जानकारी दी गई है।
नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क प्रशासन के अनुसार शेरनी माया ने सात सितंबर को दो शावकों को जन्म दिया था। यह माया का पहला प्रसव था। शावकों के जन्म को नंदनकानन में शेरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था लेकिन पहले शावक के मृत पैदा होने से खुशी अधूरी रह गई। दूसरा शावक जीवित था लेकिन जन्म के समय से ही उसकी स्थिति सामान्य नहीं थी।
जू प्रशासन ने जीवित बचे नर शावक और उसकी मां की गतिविधियों पर विशेष निगरानी शुरू की थी। बाड़े में लगे CCTV कैमरों के माध्यम से कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की टीम लगातार दोनों को देख रही थी। निगरानी के दौरान पता चला कि शावक अपनी मां का दूध ठीक तरीके से नहीं पी पा रहा है। इससे उसके शरीर को आवश्यक पोषण और ऊर्जा नहीं मिल पा रही थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पहली बार मां बनी माया ने जीवित शावक को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद जू प्रशासन ने शावक को उसकी मां से अलग कर उपचार केंद्र के शिशु पशु पृथक्करण कक्ष में रखने का निर्णय लिया। पशु चिकित्सकों ने उसे हाथ से दूध और आवश्यक पोषण देने का प्रयास किया लेकिन उसकी शारीरिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
बताया गया कि शावक को दूध पिलाने के दौरान तरल उसके मुंह से पेट तक पहुंचने के बजाय नाक से बाहर आने लगता था। इससे चिकित्सकों को उसके मुंह के अंदर जन्मजात समस्या होने का संदेह हुआ। पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं ले पाने के कारण शावक लगातार कमजोर होता गया। चिकित्सकों की निगरानी और उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और जन्म के तीन दिन बाद 10 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
शावक की मौत के बाद पशु चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में जन्मजात ‘क्लेफ्ट पैलेट’ यानी तालू में दरार को मौत का प्रमुख कारण बताया गया। इस विकृति के कारण मुंह और नाक के बीच सामान्य संरचना विकसित नहीं हो पाती। इससे नवजात के लिए दूध पीना बेहद कठिन हो जाता है और दूध नाक या श्वसन मार्ग की तरफ जा सकता है। पर्याप्त पोषण नहीं मिलने तथा दूसरी स्वास्थ्य जटिलताएं पैदा होने से शावक की हालत गंभीर हो गई थी।
नवजात वन्यजीवों के लिए जन्म के शुरुआती दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मां का पहला दूध उन्हें पोषण देने के साथ बीमारियों से बचाने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रदान करता है। किसी जन्मजात समस्या या मां द्वारा शावक को स्वीकार नहीं किए जाने की स्थिति में उसका जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। ऐसे मामलों में पशु चिकित्सक कृत्रिम तरीके से दूध और पोषण देकर शावक को बचाने का प्रयास करते हैं लेकिन जन्मजात विकृतियों के कारण उपचार जटिल हो जाता है।
नंदनकानन प्रशासन के लिए यह घटना बड़ा झटका मानी जा रही है। माया की पहली गर्भावस्था और प्रसव को लेकर जू प्रबंधन ने विशेष तैयारियां की थीं। गर्भावस्था के दौरान भी उसकी नियमित निगरानी और स्वास्थ्य जांच की गई थी। दोनों शावकों के जन्म के बाद प्रशासन को उम्मीद थी कि जीवित शावक को विशेष देखभाल के माध्यम से बचा लिया जाएगा लेकिन जन्मजात समस्या के कारण सभी प्रयास असफल हो गए।
शावक की मौत से पहले नंदनकानन में शेरों की संख्या बढ़कर 24 होने की खबर सामने आई थी। जीवित शावक की मौत के बाद पार्क में शेरों की संख्या फिर 23 रह गई है। जू प्रशासन अब माया के स्वास्थ्य और व्यवहार पर नजर रख रहा है। पहली बार मां बनने और कुछ ही दिनों में दोनों शावकों को खोने के बाद उसके व्यवहार में आने वाले संभावित बदलावों को देखते हुए विशेष निगरानी आवश्यक मानी जा रही है।
वन्यजीव प्रजनन कार्यक्रमों में नवजात शावकों की मौत संरक्षण विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय होती है। ऐसी घटनाओं के बाद माता-पिता के स्वास्थ्य आनुवंशिक इतिहास गर्भावस्था के दौरान पोषण और प्रसव से संबंधित परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिलने वाली जानकारी भविष्य के प्रजनन कार्यक्रमों और नवजातों की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
इस मामले में जन्मजात क्लेफ्ट पैलेट की जानकारी सामने आने के बाद विशेषज्ञ यह भी देख सकते हैं कि समस्या आनुवंशिक कारणों से हुई या गर्भ में विकास के दौरान किसी अन्य वजह से पैदा हुई। हालांकि किसी निश्चित कारण पर पहुंचने के लिए विस्तृत चिकित्सकीय और आनुवंशिक जांच की जरूरत होगी। अभी प्रशासन की ओर से केवल पोस्टमार्टम में सामने आई जन्मजात विकृति को शावक की मौत का प्रमुख कारण बताया गया है।
माया और नर शेर शिवम से सात सितंबर को इन दोनों शावकों का जन्म हुआ था। पहला शावक मृत पैदा हुआ और दूसरे को मां से दूध नहीं मिलने के बाद हाथ से पालने का प्रयास किया गया। दोनों की मौत ने नंदनकानन के शेर प्रजनन कार्यक्रम को झटका दिया है। फिलहाल जू प्रशासन माया की देखभाल करने के साथ पूरे घटनाक्रम की चिकित्सकीय समीक्षा कर रहा है।





