
Odisha ओडिशा: संबलपुर स्थित हीराकुंड बांध में लगातार हो रही वर्षा और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से बढ़ते जलप्रवाह के कारण जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। शुक्रवार सुबह बांध का जलस्तर बढ़कर 614.47 फीट पहुंच गया। जलाशय में बढ़ते पानी को नियंत्रित करने और सुरक्षित स्तर बनाए रखने के लिए 10 स्लुइस गेट खोलकर लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
जल संसाधन विभाग द्वारा शुक्रवार सुबह 6 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, हीराकुंड जलाशय में 85,108 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। वहीं जलस्तर को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से 1,81,500 क्यूसेक पानी बांध से नीचे की ओर छोड़ा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जलाशय की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार पानी के डिस्चार्ज में बदलाव किया जाएगा।
बांध से छोड़ा गया पानी महानदी नदी प्रणाली के विभिन्न बैराजों और नदी चैनलों के माध्यम से आगे बढ़ रहा है। इससे नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, जोबरा बैराज से 85,774 क्यूसेक पानी महानदी नदी में छोड़ा जा रहा है, जबकि नराज बैराज से 65,453 क्यूसेक पानी काठाजोड़ी नदी की ओर प्रवाहित किया जा रहा है।
इसी प्रकार, मुंडाली में पानी का डिस्चार्ज 1,46,547 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महानदी प्रणाली में पर्याप्त मात्रा में पानी का प्रवाह जारी है और नदी के विभिन्न हिस्सों में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हीराकुंड बांध से पानी छोड़ने का निर्णय पूरी तरह वैज्ञानिक आकलन और वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर लिया जाता है। जलाशय में आने वाले पानी की मात्रा, मौसम विभाग के पूर्वानुमान, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की क्षमता को ध्यान में रखते हुए पानी के डिस्चार्ज को नियमित रूप से नियंत्रित किया जाता है।
जल संसाधन विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और जल निकासी पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है, ताकि निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। इसके बावजूद विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
प्रशासन ने विशेष रूप से महानदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है, इसलिए नदी किनारे अनावश्यक रूप से जाने, स्नान करने, मछली पकड़ने या अन्य गतिविधियों से बचना चाहिए। लोगों से यह भी कहा गया है कि वे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
बांध से छोड़े जा रहे पानी का असर महानदी के निचले क्षेत्रों में स्थित जिलों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत एवं बचाव की व्यवस्था भी तैयार रखी गई है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में ओडिशा के कई हिस्सों में मानसूनी वर्षा तेज हुई है। इसके कारण नदियों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कुछ क्षेत्रों में वर्षा जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में जल संसाधन विभाग जलाशय के संचालन को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान हीराकुंड बांध का जल प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि समय रहते नियंत्रित मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जाए तो जलाशय पर दबाव बढ़ सकता है, वहीं अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए जल निकासी का पूरा संचालन वैज्ञानिक मानकों और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के अनुरूप किया जाता है।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत संपर्क करने की सलाह दी गई है।
फिलहाल हीराकुंड बांध की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलस्तर, पानी की आवक और निकासी के आंकड़ों का नियमित मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। प्रशासन का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव होता है या जल निकासी की मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है, तो इसकी जानकारी समय पर सार्वजनिक की जाएगी।
बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की प्राथमिकता जलाशय की सुरक्षा के साथ-साथ महानदी के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से जल निकासी का कार्य नियंत्रित और चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जा रहा है।





