
Odisha ओडिशा: ओडिशा में हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात के बाद मौसम विभाग ने एक बार फिर राज्य के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में एक नया लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव का क्षेत्र) विकसित हो सकता है। यदि यह मौसम प्रणाली अनुमान के अनुरूप बनती है, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में ओडिशा में एक और दौर की भारी बारिश देखने को मिल सकता है।
आईएमडी द्वारा जारी नॉर्थ इंडियन ओशन एक्सटेंडेड रेंज आउटलुक फॉर साइक्लोजेनेसिस के अनुसार, 10 जुलाई से 16 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी भाग तथा पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों के आसपास ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रणाली आगे चलकर निम्न दबाव के क्षेत्र के गठन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 17 जुलाई से 23 जुलाई के बीच, यानी अगले पूर्वानुमान सप्ताह के पहले हिस्से में, इसी क्षेत्र में एक नया लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है। यह प्रणाली यदि मजबूत होती है तो ओडिशा सहित पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
हालांकि आईएमडी ने अभी तक इस संभावित मौसम प्रणाली की तीव्रता, संभावित मार्ग या किन जिलों में कितनी वर्षा हो सकती है, इस संबंध में विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है। विभाग का कहना है कि जैसे-जैसे प्रणाली विकसित होगी, उसके आधार पर विस्तृत मौसम बुलेटिन और चेतावनी जारी की जाएगी।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र अक्सर ओडिशा में व्यापक वर्षा का कारण बनते हैं। यदि यह प्रणाली तटीय क्षेत्र की ओर बढ़ती है तो राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसका असर नदी जलस्तर, निचले इलाकों और कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
यह नया पूर्वानुमान ऐसे समय आया है जब जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी में बना एक लो प्रेशर एरिया बाद में डिप्रेशन में बदल गया था। उस मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और भारी वर्षा दर्ज की गई थी। लगातार बारिश के कारण कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था और अनेक जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए थे।
भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित हुआ, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य भी चलाने पड़े थे। कृषि क्षेत्रों में भी जलभराव के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था।
इसी पृष्ठभूमि में मौसम विभाग के नए पूर्वानुमान ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित मौसम प्रणाली को देखते हुए संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और अगस्त के दौरान बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव के क्षेत्र बनना सामान्य मानसूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि इन प्रणालियों की दिशा और तीव्रता के आधार पर वर्षा की मात्रा और प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव हो सकता है। इसलिए मौसम विभाग समय-समय पर अपने पूर्वानुमान अपडेट करता रहता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और संतुलित वर्षा खरीफ फसलों के लिए लाभकारी होती है, लेकिन अत्यधिक बारिश से धान सहित अन्य फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में किसानों को भी मौसम विभाग की सलाह पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग ने फिलहाल लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन तथा चेतावनियों पर भरोसा करने की अपील की है। विशेष रूप से मछुआरों, तटीय क्षेत्रों के निवासियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
यदि बंगाल की खाड़ी में प्रस्तावित लो प्रेशर एरिया निर्धारित समय के अनुसार विकसित होता है, तो ओडिशा में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है और राज्य के कई हिस्सों में अच्छी से भारी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि इसकी वास्तविक तीव्रता और प्रभाव का स्पष्ट आकलन आगामी दिनों में मौसम प्रणाली के विकास के बाद ही संभव होगा।
फिलहाल आईएमडी के विस्तारित पूर्वानुमान ने यह संकेत जरूर दिया है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में ओडिशा में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। ऐसे में प्रशासन, किसान और आम नागरिक सभी की नजर अब बंगाल की खाड़ी में बनने वाली संभावित मौसम प्रणाली पर टिकी हुई है।





