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ओडिशा में गणेश पूजा की धूम मंदिरों से शिक्षण संस्थानों तक उमड़े श्रद्धालु

Kavita2
14 Sept 2026 12:41 PM IST
ओडिशा में गणेश पूजा की धूम मंदिरों से शिक्षण संस्थानों तक उमड़े श्रद्धालु
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भुवनेश्वर। ओडिशा में गणेश पूजा का उत्साह देखने को मिला। राजधानी भुवनेश्वर से लेकर कटक और राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों तक श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। मंदिरों, स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक पंडालों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने विघ्नहर्ता गणेश से सुख-समृद्धि, ज्ञान, सफलता और परिवार की खुशहाली की कामना की।

गणेश पूजा के अवसर पर सुबह से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। लोगों ने भगवान गणेश को फूल, फल, मिठाई, दूर्वा और मोदक अर्पित किए। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मंत्रोच्चार और गणपति बप्पा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कई स्थानों पर सामूहिक आरती आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

भुवनेश्वर में विभिन्न पूजा समितियों की ओर से आकर्षक पंडाल बनाए गए। पंडालों को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और सजावटी वस्तुओं से सजाया गया। भगवान गणेश की छोटी-बड़ी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। शाम होते ही पंडालों की रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। परिवारों के साथ पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा समितियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

कटक में भी गणेश पूजा को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। शहर के विभिन्न इलाकों में सामुदायिक पंडालों की स्थापना की गई और पारंपरिक तरीके से पूजा की गई। कई पंडालों में सुबह से शाम तक भक्ति गीत बजते रहे। पूजा समितियों ने श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन और धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग किया।

शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी गणेश पूजा श्रद्धा के साथ मनाई गई। गांवों में लोगों ने सामूहिक रूप से प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर पारंपरिक संगीत, भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों और युवाओं ने उत्साह से इन कार्यक्रमों में भाग लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में पूजा पंडाल सामाजिक मेल-जोल और सामुदायिक एकता के केंद्र भी बने।

गणेश पूजा का शिक्षण संस्थानों में विशेष महत्व दिखाई दिया। भगवान गणेश को ज्ञान, विवेक और बुद्धि का देवता माना जाता है। इसी कारण स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों ने श्रद्धा के साथ पूजा की। कई संस्थानों में गणेश प्रतिमा स्थापित कर विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

छात्रों ने पढ़ाई में सफलता, बेहतर परीक्षा परिणाम और उज्ज्वल भविष्य के लिए भगवान गणेश का आशीर्वाद मांगा। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को इस पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में बताया। पूजा के बाद प्रसाद बांटा गया और कई संस्थानों में नृत्य, संगीत, भाषण तथा अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं।

कई विद्यार्थियों ने पूजा की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाई। किसी ने पंडाल की सजावट की तो किसी ने फूलों और पूजा सामग्री की व्यवस्था संभाली। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। कुछ संस्थानों में चित्रकला, रंगोली और भक्ति गीत प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को धार्मिक परंपराओं के साथ सामूहिक जिम्मेदारी और सहयोग का संदेश दिया गया।

भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है क्योंकि मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसी कारण व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों सहित हर वर्ग के श्रद्धालुओं ने पूजा कर सफलता और समृद्धि की कामना की।

पूजा पंडालों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुखता से देखने को मिला। कई आयोजकों ने सजावट के लिए प्राकृतिक और दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली सामग्री को प्राथमिकता दी। श्रद्धालुओं से स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक का कम उपयोग करने की अपील की गई। पूजा स्थलों के आसपास साफ-सफाई के लिए स्वयंसेवकों की टीमें भी सक्रिय रहीं।

त्योहार को लेकर बाजारों में भी रौनक बनी रही। फूलों, फलों, मिठाइयों, पूजा सामग्री और सजावट की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ दिखाई दी। भगवान गणेश को प्रिय माने जाने वाले मोदक और लड्डू की मांग अधिक रही। मूर्तिकारों और सजावटी सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों को भी पूजा के कारण कारोबार बढ़ने की उम्मीद रही।

शाम के समय कई पूजा पंडालों में भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। कुछ जगह धार्मिक कथाओं और भगवान गणेश से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, शिक्षा और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में आस्था और उल्लास का अनूठा संगम दिखाई दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। भगवान गणेश के जयकारों और भक्ति गीतों से मंदिर तथा पंडाल गूंजते रहे।

ओडिशा में मनाई गई गणेश पूजा ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश दिया। भुवनेश्वर तथा कटक के भव्य पंडालों से लेकर ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक आयोजनों तक उत्सव का रंग छाया रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से सभी बाधाओं को दूर करने और जीवन में ज्ञान, शांति, सुख तथा सफलता प्रदान करने की प्रार्थना की।

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