
कटक : अनुभवी स्वतंत्रता सेनानी और ‘स्टेट फ्रीडम फाइटर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष बिंबाधर मुदुली का निधन हो गया। वे 102 वर्ष के थे। उन्होंने कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन से स्वतंत्रता सेनानी समुदाय और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में शोक की लहर है।
केंद्रपाड़ा जिले के रहने वाले बिंबाधर मुदुली भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अपने योगदान के लिए लंबे समय से सम्मानित रहे। उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी और स्वतंत्रता के बाद भी समाज और स्वतंत्रता सेनानियों के हितों से जुड़े कार्यों में लगातार सक्रिय रहे।
उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचने के बाद भी मुदुली का जुड़ाव स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन से बना रहा। वे स्वतंत्रता सेनानियों की समस्याओं, सम्मान और कल्याण से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे। हाल ही में उन्हें ‘स्टेट फ्रीडम फाइटर्स एसोसिएशन’ का अध्यक्ष चुना गया था।
परिवार और संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, बिंबाधर मुदुली लंबे समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
मुदुली के निधन की खबर सामने आने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने शोक व्यक्त किया। लोगों ने उन्हें देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली पीढ़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और उनके योगदान को याद किया।
स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल लोगों की संख्या अब लगातार कम होती जा रही है। ऐसे में बिंबाधर मुदुली जैसे स्वतंत्रता सेनानी नई पीढ़ी के लिए इतिहास और प्रेरणा के महत्वपूर्ण स्रोत रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक देश के स्वतंत्रता संग्राम की यादों और मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम किया।
केंद्रपाड़ा जिले के स्थानीय लोगों ने भी उनके निधन पर दुख जताया। ग्रामीणों का कहना है कि मुदुली न केवल स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा थे, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति भी थे। उन्होंने युवाओं को देश के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया।
‘स्टेट फ्रीडम फाइटर्स एसोसिएशन’ से जुड़े सदस्यों ने कहा कि मुदुली के नेतृत्व में संगठन ने स्वतंत्रता सेनानियों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर काम किया। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से संगठन को लंबे समय तक लाभ मिला।
बिंबाधर मुदुली का जीवन देश की आजादी के संघर्ष, त्याग और समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन की कहानियों से परिचित कराया और देश सेवा की भावना को मजबूत किया।
उनके निधन के साथ स्वतंत्रता संग्राम की एक जीवंत कड़ी का अंत हो गया है। हालांकि, उनके योगदान और विचार हमेशा लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।
अस्पताल प्रशासन और संगठन की ओर से उनके अंतिम संस्कार और अन्य कार्यक्रमों को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। उनके परिवार, समर्थकों और स्वतंत्रता सेनानी समुदाय ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।





