
बालासोर : ओडिशा के बालासोर ज़िले स्थित कुलदिहा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी में शुक्रवार को एक किसान ने अद्भुत साहस का परिचय देते हुए बाघिन का सामना किया। बाघिन के हमले में किसान गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन उसकी बहादुरी और सूझबूझ की बदौलत उसकी जान बच गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में किसान के साहस की चर्चा हो रही है।
घायल किसान की पहचान बालासोर ज़िले के नीलगिरि ब्लॉक के नाटापाडा गाँव निवासी सुनील सिंह (26) के रूप में हुई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार किसान के शरीर पर गहरे घाव हैं और उसकी हालत पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को सुनील सिंह किसी काम से कुलदिहा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के निकट इलाके में गया हुआ था। इसी दौरान अचानक झाड़ियों से निकलकर एक बाघिन ने उस पर हमला कर दिया। हमले के कारण वह जमीन पर गिर गया और बाघिन ने उसे घायल कर दिया। अचानक हुए हमले से आसपास मौजूद लोग घबरा गए, लेकिन सुनील ने घबराने के बजाय साहस का परिचय दिया और पूरी ताकत से बाघिन का मुकाबला किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किसान ने स्वयं को बचाने के लिए उपलब्ध साधनों का उपयोग किया और लगातार संघर्ष करता रहा। उसके शोर और प्रतिरोध के कारण आसपास के ग्रामीण भी घटनास्थल की ओर दौड़े। ग्रामीणों की आवाज़ और हलचल बढ़ने पर बाघिन जंगल की ओर लौट गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने घायल किसान को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी। वन विभाग ने लोगों से जंगल के अंदर या उसके आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने और सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
वन अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बाघिन अपने प्राकृतिक आवास में थी और किसी कारणवश उसका सामना किसान से हो गया। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि बाघिन जंगल से बाहर क्यों आई और हमले की परिस्थितियां क्या थीं।
कुलदिहा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी ओडिशा के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है, जहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, हिरण और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। अभयारण्य के आसपास बसे गांवों के लोगों का जंगल से नियमित संपर्क रहता है। ऐसे क्षेत्रों में कभी-कभी वन्यजीव और इंसानों का आमना-सामना हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। सुबह और शाम के समय, जब वन्यजीव अधिक सक्रिय होते हैं, जंगल के भीतर या उसके किनारे जाने से बचना चाहिए। यदि किसी वन्यजीव का सामना हो जाए तो उसे उकसाने या उसके बहुत करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।
घटना के बाद नाटापाडा गांव में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जंगल के आसपास नियमित गश्त बढ़ाने और वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले भी जंगली जानवरों की आवाजाही देखी गई है, इसलिए लोगों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाने चाहिए।
स्थानीय लोगों ने सुनील सिंह की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। यदि उन्होंने साहस और सूझबूझ से काम नहीं लिया होता, तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था। ग्रामीणों ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में बाघ या अन्य खतरनाक वन्यजीव दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें और स्वयं उन्हें पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें। अधिकारियों का कहना है कि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम करने के लिए जनजागरूकता और सतर्कता बेहद आवश्यक है।
फिलहाल घायल किसान का अस्पताल में इलाज जारी है और वन विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है। इस घटना ने एक बार फिर जंगल से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। वहीं, सुनील सिंह के साहस और जीवटता की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है और लोग उनके जल्द स्वस्थ होकर घर लौटने की कामना कर रहे हैं।





