ओडिशा

बहुडा यात्रा में श्रद्धालु की मौत पर बीजद का सरकार पर हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

Kavita2
25 July 2026 9:37 AM IST
बहुडा यात्रा में श्रद्धालु की मौत पर बीजद का सरकार पर हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
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भुवनेश्वर/पुरी : बीजू जनता दल (बीजद) ने पुरी में आयोजित बहुडा यात्रा के दौरान एक श्रद्धालु की मौत की घटना को लेकर ओडिशा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह घटना राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से वार्षिक रथ यात्रा के सुचारु आयोजन तथा लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार हो रही विफलताओं को उजागर करती है। बीजद ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

शुक्रवार को जारी अपने बयान में बीजद नेताओं ने कहा कि पुरी की रथ यात्रा और उससे जुड़ी बहुडा यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इतने बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, चिकित्सा सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं की व्यापक व्यवस्था होना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। पार्टी का कहना है कि एक श्रद्धालु की मौत इस बात का संकेत है कि इन व्यवस्थाओं में कहीं न कहीं गंभीर कमी रही है।

बीजद ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में रथ यात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। पार्टी का कहना है कि प्रशासन को हर वर्ष इस आयोजन का अनुभव होने के बावजूद आवश्यक तैयारियों में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। यदि समय रहते पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाते और भीड़ प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था होती, तो ऐसी दुखद घटना से बचा जा सकता था।

पार्टी नेताओं ने कहा कि रथ यात्रा केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे आयोजन में किसी भी श्रद्धालु की जान जाना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। उन्होंने मृतक श्रद्धालु के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

बीजद ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि बहुडा यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए कितने पुलिसकर्मी, स्वयंसेवक और आपदा प्रबंधन कर्मियों की तैनाती की गई थी। साथ ही पार्टी ने यह भी जानना चाहा कि भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए क्या विशेष इंतजाम किए गए थे और घटना के समय प्रशासन ने कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दी।

पार्टी का कहना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आधुनिक तकनीक, निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, सार्वजनिक सूचना प्रणाली और प्रशिक्षित सुरक्षा बलों का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुरी की रथ यात्रा और बहुडा यात्रा जैसे आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होती है। ऐसे आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक योजना बनानी पड़ती है। किसी भी प्रकार की चूक गंभीर परिणाम ला सकती है, इसलिए विपक्ष अक्सर ऐसी घटनाओं पर सरकार की तैयारियों और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाता है।

बीजद ने कहा कि राज्य सरकार को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी श्रद्धालु की जान जोखिम में न पड़े। पार्टी ने मांग की कि इस घटना की विस्तृत जांच कर यह पता लगाया जाए कि किन परिस्थितियों में श्रद्धालु की मौत हुई और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

पार्टी ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। धार्मिक आयोजनों की सफलता केवल परंपराओं के निर्वहन से नहीं, बल्कि उसमें शामिल प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने से भी तय होती है। इसलिए प्रशासन को भविष्य में और अधिक प्रभावी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

फिलहाल इस घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बीजद लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहा है। वहीं, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भी अपेक्षा है कि भविष्य में रथ यात्रा और बहुडा यात्रा जैसे विशाल आयोजनों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जाए, ताकि लाखों श्रद्धालु बिना किसी भय या असुविधा के अपनी धार्मिक आस्था का पालन कर सकें। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और इस घटना के बाद उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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