ओडिशा
341 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में रतिकांत राउत पर ED का शिकंजा
Rajeshwari Nishad
19 Oct 2026 9:57 PM IST

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भुवनेश्वर: ओडिशा में कथित अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खनन कारोबारी रतिकांत राउत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 अक्टूबर को भुवनेश्वर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में उनके खिलाफ पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल किया है। ईडी का आरोप है कि रतिकांत राउत और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कथित अवैध गतिविधियों के जरिए 341 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई है।
इस मामले में पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल होने के बाद जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, ईडी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। फिलहाल, इस मामले ने ओडिशा में कथित अवैध खनन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर एक बार फिर ध्यान खींचा है।
16 अक्टूबर को विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल हुआ परिवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडी के भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने 16 अक्टूबर को विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत में रतिकांत राउत के खिलाफ पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल किया। यह कार्रवाई कथित अवैध खनन और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
पीएमएलए के तहत ईडी उन मामलों की जांच करती है, जिनमें अपराध से अर्जित धन को छिपाने, उसका इस्तेमाल करने या उसे वैध संपत्ति के रूप में पेश करने का संदेह होता है। जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, कंपनियों के रिकॉर्ड और संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखती है।
पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल करने का अर्थ है कि जांच एजेंसी पहले से चल रही कानूनी कार्यवाही में अतिरिक्त आरोपों, तथ्यों या साक्ष्यों को अदालत के सामने रख रही है। हालांकि, इस मामले में पहले दाखिल किए गए परिवाद और नए परिवाद के बीच संबंध तथा इसमें शामिल अतिरिक्त तथ्यों का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगा।
341 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जुटाने का आरोप
ईडी के अनुसार, रतिकांत राउत और उनसे जुड़ी कंपनियों ने कथित अवैध गतिविधियों के माध्यम से 341 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई। एजेंसी इस रकम को कथित अवैध कमाई से जोड़कर देख रही है। मामले की जांच में यह पता लगाना अहम होगा कि कथित रकम किन गतिविधियों से हासिल की गई और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि किसी कथित अपराध से प्राप्त धन को विभिन्न वित्तीय लेनदेन, कंपनियों या संपत्तियों के माध्यम से किस प्रकार स्थानांतरित किया गया। इसके लिए बैंक खातों, कारोबारी दस्तावेजों, संपत्ति के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों की जांच की जा सकती है।
हालांकि, 341 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर ईडी का आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। इस रकम से संबंधित संपत्तियों की प्रकृति, कथित लेनदेन की पूरी श्रृंखला और कंपनियों की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने पर मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों की जांच
ओडिशा में खनन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में अवैध खनन से जुड़े मामलों में केवल खनिजों के उत्खनन की वैधता ही नहीं, बल्कि उससे होने वाली कमाई और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा सकती है। यदि किसी कथित अपराध से धन अर्जित किया गया हो और बाद में उसे छिपाने या वैध दिखाने की कोशिश की गई हो, तो मामला मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आ सकता है।
रतिकांत राउत के मामले में ईडी ने आरोप लगाया है कि कारोबारी और उनसे जुड़ी कंपनियों ने अवैध गतिविधियों के जरिये बड़ी मात्रा में अपराध से अर्जित संपत्ति जुटाई। अब अदालत में दाखिल पूरक परिवाद के जरिए एजेंसी अपना पक्ष रखेगी। मामले में आरोपों को साबित करने के लिए जांच एजेंसी को संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करने होंगे।
यह भी महत्वपूर्ण है कि अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों की जांच में अलग-अलग कानूनों और प्रक्रियाओं की भूमिका हो सकती है। इसलिए इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और आधिकारिक जानकारी पर नजर बनी रहेगी।
पीएमएलए के तहत क्या होती है कार्रवाई?
धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए का उद्देश्य अपराध से अर्जित धन को वैध अर्थव्यवस्था में शामिल करने की गतिविधियों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत ईडी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच कर सकती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अदालत में अभियोजन की कार्यवाही शुरू कर सकती है।
अदालत में अभियोजन परिवाद दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ती है। अदालत दस्तावेजों, साक्ष्यों और पक्षों की दलीलों पर विचार करती है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप दाखिल होना या जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाए जाना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
इसी वजह से रतिकांत राउत के मामले में भी अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
ईडी की ओर से पूरक अभियोजन परिवाद दाखिल किए जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी के आरोपों, कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित कंपनियों की भूमिका पर अदालत में विचार किया जा सकता है। हालांकि, अगली सुनवाई की तारीख, संभावित आरोपों के विस्तृत ब्योरे और किसी अन्य कार्रवाई के संबंध में पुष्टि उपलब्ध होने पर ही जानकारी दी जा सकती है।
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