
कोरापुट। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के तहत आने वाले नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NBRI) के पूर्व निदेशक डॉ. अजीत कुमार शसानी ने गुरुवार को सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा (CUO), कोरापुट के नए वाइस-चांसलर के रूप में पदभार संभाल लिया। भारत के राष्ट्रपति द्वारा पांच साल के कार्यकाल के लिए उनकी नियुक्ति किए जाने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी संभाली।
डॉ. शसानी 6 अगस्त की सुबह विश्वविद्यालय पहुंचे और औपचारिक रूप से वाइस-चांसलर का कार्यभार ग्रहण किया। उनकी नियुक्ति की घोषणा 2 जुलाई, 2026 को की गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि उनके अनुभव और नेतृत्व से संस्थान को नई दिशा मिलेगी।
डॉ. अजीत कुमार शसानी विज्ञान और शोध के क्षेत्र में लंबे अनुभव वाले शिक्षाविद हैं। वह इससे पहले CSIR-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NBRI) के निदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं। वनस्पति विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है।
वाइस-चांसलर के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब केंद्रीय विश्वविद्यालय ऑफ ओडिशा उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि डॉ. शसानी के नेतृत्व में शोध गतिविधियों, अकादमिक गुणवत्ता और संस्थागत विकास को बढ़ावा मिलेगा।
पदभार संभालने के बाद डॉ. शसानी ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की। उन्होंने संस्थान की मौजूदा स्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बेहतर वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास के लिए शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. शसानी का वैज्ञानिक करियर कई दशकों तक फैला हुआ है। उन्होंने शोध और संस्थागत प्रबंधन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। NBRI जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान का नेतृत्व करने के दौरान उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए काम किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाले वाइस-चांसलर की नियुक्ति से केंद्रीय विश्वविद्यालय ऑफ ओडिशा में शोध आधारित शिक्षा को नई गति मिल सकती है। खासकर जैव विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर विकसित होने की संभावना है।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शामिल है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय जरूरतों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। कोरापुट जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित होने के कारण विश्वविद्यालय की भूमिका शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
डॉ. शसानी के सामने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने और छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने जैसी कई जिम्मेदारियां होंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, नए वाइस-चांसलर के अनुभव से संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने में मदद मिलेगी। उनके नेतृत्व में नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने, उद्योग और शोध संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने और छात्रों के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
डॉ. शसानी ने पदभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय को एक बेहतर शोध और शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि संस्थान के विकास के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
उनकी नियुक्ति को केंद्रीय विश्वविद्यालय ऑफ ओडिशा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब विश्वविद्यालय समुदाय की नजरें उनके नेतृत्व में शुरू होने वाली नई पहलों और विकास योजनाओं पर रहेंगी।





