
भुवनेश्वर/कालाहांडी: ओडिशा के कालाहांडी जिले के आदिवासी व्यक्ति दाना माझी ने शॉर्ट फिल्म ‘लाश’ के निर्माताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। दाना माझी का आरोप है कि यह फिल्म उनकी वास्तविक जिंदगी की घटना पर आधारित है, लेकिन फिल्म बनाने से पहले उनकी अनुमति नहीं ली गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई।
दाना माझी वर्ष 2016 में उस समय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे, जब अस्पताल से शव वाहन नहीं मिलने के कारण उन्हें अपनी पत्नी के शव को कंधे पर रखकर करीब 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा था। इस घटना ने देश में स्वास्थ्य सेवाओं और गरीब परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी थी।
माझी का कहना है कि शॉर्ट फिल्म ‘लाश’ में दिखाई गई कहानी उनकी जिंदगी की घटना से मिलती-जुलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माताओं ने उनकी व्यक्तिगत त्रासदी और अनुभव का इस्तेमाल किया, लेकिन इसके लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली गई।
दाना माझी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में फिल्म के निर्माताओं और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान फिल्म की कहानी, निर्माण प्रक्रिया और शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जाएगी।
2016 में सामने आई दाना माझी की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उनकी पत्नी अमंग देई की बीमारी के कारण अस्पताल में मौत हो गई थी। आरोप था कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने और अस्पताल से शव वाहन की सुविधा नहीं मिलने के कारण दाना माझी को मजबूरी में अपनी पत्नी के शव को कंधे पर उठाकर गांव की ओर जाना पड़ा था। उनकी बेटी भी उस समय उनके साथ चल रही थी।
घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद देशभर में इसकी चर्चा हुई थी। इसके बाद प्रशासन और सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सवालों के जवाब देने पड़े थे। इस घटना को अक्सर गरीब और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।
अब कई साल बाद इसी घटना को लेकर एक बार फिर दाना माझी चर्चा में हैं। उनका कहना है कि उनकी जिंदगी के सबसे कठिन समय को किसी फिल्म की कहानी के रूप में इस्तेमाल करने से पहले उनकी सहमति ली जानी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि फिल्म में उनकी व्यक्तिगत कहानी और संघर्ष को दर्शाया गया है।
फिल्म निर्माताओं की ओर से इस मामले में अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फिल्म और दाना माझी की वास्तविक घटना के बीच कितना संबंध है और क्या किसी कानूनी उल्लंघन की स्थिति बनती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति के वास्तविक जीवन की घटना पर आधारित रचना तैयार करने के लिए कई परिस्थितियों में अनुमति, सहमति और अधिकारों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। खासकर तब, जब कहानी किसी व्यक्ति की निजी त्रासदी और पहचान से सीधे जुड़ी हो।
दाना माझी की शिकायत ने एक बार फिर इस बहस को जन्म दिया है कि वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्मों और कहानियों में संबंधित व्यक्ति की सहमति और अधिकारों का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए। रचनात्मक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना इस तरह के मामलों में अहम मुद्दा होता है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर यह तय होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दाना माझी का कहना है कि उनकी जिंदगी की घटना का इस्तेमाल बिना अनुमति नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें न्याय मिलना चाहिए।





