ओडिशा
कछुओं को बचाने की बड़ी पहल, 7 महीने तक मछली पकड़ने पर रोक
Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 2:16 PM IST

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भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने समुद्री जैव विविधता और दुर्लभ ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिए बड़ा फैसला लिया है। कछुओं के प्रजनन और अंडे देने के मौसम को देखते हुए राज्य के निर्धारित समुद्री क्षेत्रों में सात महीने तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई है। यह प्रतिबंध 1 नवंबर 2026 से लागू होगा और 31 मई 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान गहिरमथा समुद्री अभयारण्य सहित कछुओं के प्रमुख प्रजनन क्षेत्रों में मशीनीकृत नौकाओं और ट्रॉलरों के संचालन पर रोक रहेगी। वन विभाग ने कछुओं की सुरक्षा के लिए 14 विशेष शिविर स्थापित करने की व्यवस्था की है। इन शिविरों के माध्यम से समुद्र में गश्त, अवैध मछली पकड़ने की निगरानी और अंडे देने वाले समुद्री तटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य हर साल हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा करके ओडिशा के तटों पर पहुंचने वाले कछुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
1 नवंबर से 31 मई तक लागू रहेगा प्रतिबंध
वन विभाग के अनुसार, ओलिव रिडले कछुओं का प्रजनन काल शुरू होने के कारण समुद्री क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जाएगी। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से गहिरमथा समुद्री अभयारण्य और धामरा नदी के मुहाने से देवी नदी के मुहाने तक करीब 160 किलोमीटर के तटीय क्षेत्र से संबंधित है।
समुद्र तट से लगभग 20 किलोमीटर के निर्धारित दायरे में मशीनीकृत ट्रॉलर, मोटर चालित नौकाओं और अन्य प्रतिबंधित मछली पकड़ने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सात महीने का प्रतिबंध ओडिशा के पूरे समुद्री क्षेत्र में सभी प्रकार की मछली पकड़ने की गतिविधियों पर समान रूप से लागू नहीं है। यह कछुओं के संरक्षण के लिए अधिसूचित क्षेत्रों और निर्धारित गतिविधियों से संबंधित है।गहिरमथा समुद्री अभयारण्य में मछली पकड़ने और ट्रॉलर संचालन पर पहले से ही सालभर विशेष प्रतिबंध लागू हैं। प्रजनन काल के दौरान आसपास के क्षेत्रों में निगरानी और सख्त की जाएगी।
कछुओं की सुरक्षा के लिए 14 विशेष कैंप
वन विभाग ने प्रजनन काल में कछुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 14 स्थानों पर विशेष निगरानी शिविरों की व्यवस्था की है।इनमें बाबूबाली, मादली, एककूला, सातभाया, जौदिया, दोबांधी, तालचुआ, जटाधार, सांडकुद, हावाखाना, रामतारा और बंदर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।बाबूबाली और मादली में अधिकारियों के लिए विशेष शिविर बनाए गए हैं। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में वन विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।बाबूबाली और शासनपेटा में सशस्त्र पुलिस रिजर्व बल की एक-एक टुकड़ी तैनात करने की भी योजना है।इन शिविरों के माध्यम से वन विभाग की टीमें समुद्री तटों की निगरानी करेंगी और अंडे देने के लिए आने वाले कछुओं को मानवीय गतिविधियों से होने वाले नुकसान से बचाने का प्रयास करेंगी।
हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं ओलिव रिडले कछुए
ओलिव रिडले समुद्री कछुए अपनी लंबी समुद्री यात्राओं और सामूहिक अंडे देने की विशेष प्रक्रिया के लिए जाने जाते हैं।हर साल नवंबर से दिसंबर के दौरान बड़ी संख्या में ये कछुए ओडिशा के समुद्री तटों के आसपास पहुंचने लगते हैं। इसके बाद अनुकूल परिस्थितियों में मादा कछुए अंडे देने के लिए समुद्र से बाहर आती हैं।ओडिशा का गहिरमथा समुद्री क्षेत्र दुनिया के महत्वपूर्ण ओलिव रिडले प्रजनन स्थलों में शामिल है।इसके अलावा ऋषिकुल्या और देवी नदी के मुहाने भी इन कछुओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, मादा ओलिव रिडले कछुआ एक बार में सामान्यतः लगभग 100 से 140 अंडे दे सकती है।इन कछुओं के एक साथ बड़ी संख्या में तट पर पहुंचकर अंडे देने की प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में अरिबाडा कहा जाता है।
मछली पकड़ने वाले जाल बनते हैं बड़ी चुनौती
ओलिव रिडले कछुओं के लिए मछली पकड़ने वाले जाल और ट्रॉलरों के प्रोपेलर गंभीर खतरा पैदा करते हैं।कई बार कछुए समुद्र में बिछाए गए जालों में फंस जाते हैं। समुद्री कछुओं को सांस लेने के लिए पानी की सतह पर आना पड़ता है, लेकिन जाल में फंसने के कारण वे ऐसा नहीं कर पाते।इसके अलावा तेज गति से चलने वाली मशीनीकृत नौकाओं के प्रोपेलर से टकराने पर भी कछुए घायल हो सकते हैं या उनकी मौत हो सकती है।इन्हीं खतरों को कम करने के लिए ओडिशा सरकार हर साल प्रजनन मौसम में मछली पकड़ने पर निर्धारित प्रतिबंध लागू करती है।सरकार का मानना है कि इन उपायों से कछुओं के सुरक्षित प्रजनन और उनकी आबादी के संरक्षण में मदद मिलती है।
समुद्र में गश्त बढ़ाने के निर्देश
वन विभाग ने अवैध मछली पकड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में ट्रॉलरों की आवाजाही रोकने के लिए समुद्री गश्त बढ़ाने का निर्णय लिया है।हालांकि, विभाग के सामने संसाधनों की कमी भी एक चुनौती बनी हुई है।रिपोर्ट के अनुसार, गहिरमथा-1 और गहिरमथा-2 नामक दो स्पीड बोट लंबे समय से खराब हैं। फिलहाल विभाग के पास सीमित गश्ती संसाधन उपलब्ध हैं।डीएफओ भरतराज गांवकर ने बताया कि एक नवंबर से तीन ट्रॉलर गश्ती अभियान में शामिल किए जाएंगे।वन विभाग का प्रयास रहेगा कि प्रजनन काल के दौरान प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
मछुआरों की आजीविका पर भी पड़ेगा असर
सात महीने तक मछली पकड़ने पर लगने वाले प्रतिबंध का असर तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा समुदायों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।ओडिशा के समुद्री तटीय इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार मछली पकड़ने और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर हैं।पिछले वर्षों में मछुआरा संगठनों ने प्रतिबंध की अवधि कम करने और प्रभावित परिवारों को अधिक आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई थी।पर्यावरण संरक्षण और मछुआरों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।इस बार प्रभावित परिवारों को मिलने वाले मुआवजे या आर्थिक सहायता की नई राशि की स्पष्ट पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई
ओलिव रिडले कछुओं के संरक्षण के लिए लागू प्रतिबंध ओडिशा समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1982 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रासंगिक प्रावधानों से जुड़ा है।प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
वन विभाग, मत्स्य विभाग और अन्य सुरक्षा एजेंसियां कछुओं के संरक्षण के लिए मिलकर काम करती हैं।सरकार का उद्देश्य केवल अंडे देने वाले कछुओं की सुरक्षा करना नहीं, बल्कि उनके बच्चों के अंडों से निकलकर समुद्र तक सुरक्षित पहुंचने की संभावना को भी बेहतर बनाना है।ओडिशा सरकार का यह सात महीने का संरक्षण अभियान समुद्री पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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