
ओडिशा : कलिंग हेरिटेज प्रिजर्वेशन ट्रस्ट (KHPT) के चेयरमैन अनिल डे का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 96 वर्ष के थे। जानकारी के अनुसार, कटक के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनका निधन हो गया।
अनिल डे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती थे। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था और बताया जा रहा था कि उनकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था। हालांकि, सोमवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अनिल डे कलिंग हेरिटेज प्रिजर्वेशन ट्रस्ट के प्रमुख पद पर रहते हुए ओडिशा की विरासत और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण को लेकर लंबे समय तक काम किया।
KHPT का उद्देश्य ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन संरचनाओं और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थलों के संरक्षण को बढ़ावा देना है। अनिल डे ने ट्रस्ट के माध्यम से विरासत संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और इस दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया है। कई लोगों ने उन्हें ओडिशा की विरासत के संरक्षण के लिए समर्पित व्यक्ति बताया और उनके योगदान को याद किया।
अनिल डे लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे विरासत संरक्षण से जुड़े कार्यों में सक्रिय थे और ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए प्रयासरत रहते थे।
उनके सहयोगियों के अनुसार, अनिल डे का दृष्टिकोण केवल पुराने भवनों और स्मारकों को संरक्षित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वे इससे जुड़ी संस्कृति, इतिहास और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर भी जोर देते थे।
ओडिशा में कई ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर काम करने वाले संगठनों के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि विरासत केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।
उनके निधन से कलिंग हेरिटेज प्रिजर्वेशन ट्रस्ट और राज्य के सांस्कृतिक क्षेत्र में एक बड़ी क्षति मानी जा रही है। उनके साथ काम करने वाले लोगों ने कहा कि उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
अनिल डे का जीवन सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से इतिहास और विरासत के महत्व को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों के लिए यह एक बड़ी क्षति है। उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार और अन्य कार्यक्रमों को लेकर जानकारी परिवार की ओर से साझा की जाएगी।
सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि अनिल डे द्वारा शुरू किए गए विरासत संरक्षण के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे और उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।
उनके निधन से ओडिशा के सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। 96 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय रहकर विरासत संरक्षण के लिए काम करने वाले अनिल डे का योगदान राज्य के इतिहास में याद किया जाएगा।





