ओडिशा

चक्रवात 'अर्णव' को लेकर अलर्ट, 8 जिलों में बचाव अभियान

Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 6:51 PM IST
चक्रवात अर्णव को लेकर अलर्ट, 8 जिलों में बचाव अभियान
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भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान 'अर्णब' (Cyclone Arnab) के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी की अध्यक्षता में भुवनेश्वर के राजीव भवन स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष राहत आयुक्त, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, मौसम विभाग के प्रतिनिधि और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी शामिल हुए। सरकार ने संभावित प्रभावित जिलों में बचाव दलों की तैनाती, राहत शिविरों की व्यवस्था और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवाती तूफान 28 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है। हालांकि, इसके प्रभाव से दक्षिण ओडिशा के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका है।
राजीव भवन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने 23 अक्टूबर को भुवनेश्वर स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र में समीक्षा बैठक की थी।इस बैठक में मुख्य सचिव अनु गर्ग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार पाढ़ी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पुलिस, अग्निशमन विभाग तथा मौसम विभाग के अधिकारियों ने भी तैयारियों की जानकारी दी।संभावित प्रभावित जिलों के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।मंत्री सुरेश पुजारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आपदा के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग आपसी समन्वय से काम करें।
सरकार ने अपनाई जीरो कैजुअल्टी की नीति
ओडिशा सरकार ने चक्रवाती तूफान के दौरान जनहानि रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति किसी भी स्थिति में लोगों की जान बचाने की है।उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि निचले इलाकों, नदी किनारे और कमजोर मकानों में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें जरूरत के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।इसके अलावा गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।सरकार ने जिला स्तर पर आपातकालीन योजनाएं सक्रिय रखने और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
1700 से अधिक राहत शिविर तैयार
चक्रवाती तूफान से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत केंद्र तैयार किए हैं।विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल के अनुसार, राज्य में 135 स्थायी चक्रवात आश्रय स्थल और लगभग 1,600 अस्थायी राहत शिविर तैयार रखे गए हैं।इन केंद्रों में प्रभावित लोगों को जरूरत के अनुसार सुरक्षित ठहराया जा सकेगा।राहत शिविरों में पीने के पानी, भोजन, आवश्यक दवाओं और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार ने संभावित प्रभावित जिलों में राहत कार्यों के लिए 19 करोड़ रुपये जारी किए हैं।इनमें गंजाम जिले के लिए पांच करोड़ रुपये और सात अन्य जिलों के लिए दो-दो करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।
छह दक्षिणी जिलों में विशेष सतर्कता
चक्रवाती तूफान के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा के दक्षिणी जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और नबरंगपुर जिलों में प्रशासनिक तैयारियां तेज की गई हैं।इन जिलों में भारी बारिश के कारण जलभराव, अचानक बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा हो सकता है।अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों, झरनों और जलाशयों के आसपास पर्यटन गतिविधियों पर भी एहतियाती प्रतिबंध लगाए हैं।इन उपायों का उद्देश्य खराब मौसम के दौरान लोगों को जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से रोकना है।
एनडीआरएफ और ओड्राफ की टीमें तैयार
तूफान से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और अग्निशमन विभाग को तैयार रखा गया है।राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव दलों की तैनाती की है।अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।इसके अलावा सड़कों पर पेड़ गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और जलभराव जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया है।राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों और सशस्त्र बलों से भी सहयोग लेने की तैयारी में है।
28 अक्टूबर को तट से टकरा सकता है तूफान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्णब के 28 अक्टूबर की पूर्वाह्न में आंध्र प्रदेश और यानाम के तटीय क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है।मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि तूफान बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार कर सकता है।इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि झोंकों की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।तूफान का मुख्य प्रभाव आंध्र प्रदेश में पड़ने की संभावना है, लेकिन ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भी तेज हवाएं और अत्यधिक बारिश हो सकती है।
भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी
मौसम विभाग ने ओडिशा के कई जिलों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।विशेष रूप से गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी में तेज बारिश तथा हवाओं से नुकसान की आशंका जताई गई है।कुछ जिलों में अत्यधिक भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है।पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी पैदा हो सकती है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग तथा स्थानीय अधिकारियों की चेतावनियों का पालन करें।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
समुद्र में खराब मौसम की आशंका को देखते हुए मछुआरों को 26 से 29 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में नहीं जाने की सलाह दी गई है।सरकार ने समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर एहतियाती प्रतिबंध लगाए हैं।इसके अलावा बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में नावों तथा अन्य जहाजों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन ने समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने को कहा है।गर्भवती महिलाओं और मरीजों के लिए विशेष व्यवस्थाओडिशा सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को भी हाई अलर्ट पर रखा है।
संभावित प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को आवश्यकता के अनुसार अस्पतालों तथा सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।सरकार ने प्रसव के करीब पहुंच चुकी लगभग तीन हजार गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचाने की योजना बनाई है।इसके अलावा अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा संसाधनों का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है।
बिजली-पानी और सड़कों की बहाली की तैयारी
चक्रवाती तूफान के दौरान तेज हवाओं के कारण बिजली के खंभे, पेड़ और अन्य संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।इसी को ध्यान में रखते हुए बिजली, लोक निर्माण और जलापूर्ति विभागों को जरूरी उपकरण तथा कर्मचारियों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।सरकार का प्रयास है कि तूफान के कारण आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने पर उन्हें जल्द बहाल किया जा सके।जिला स्तर पर चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय किए गए हैं।
केंद्र सरकार भी रख रही लगातार नजर
चक्रवाती तूफान को लेकर केंद्र सरकार भी लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।26 अक्टूबर को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति की बैठक हुई।इसमें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी की तैयारियों की समीक्षा की गई।केंद्र ने राज्यों को जनहानि रोकने, आवश्यक सेवाओं की सुरक्षा और आपदा के बाद राहत कार्य तेज करने पर ध्यान देने के निर्देश दिए।
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