ओडिशा

सुदर्शन पटनायक की रेत कला से Puri Beach पर अक्षय तृतीया का जश्न

Ratna Netam
20 April 2026 4:58 PM IST
सुदर्शन पटनायक की रेत कला से Puri Beach पर अक्षय तृतीया का जश्न
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Odisha.ओडिशा: आज अक्षय तृतीया के अवसर पर पुरी बीच पर कला प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए एक विशेष और आकर्षक दृश्य देखने को मिला। प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने अपनी मनमोहक रेत कला के माध्यम से समुद्र के किनारे इस पर्व को जीवंत कर दिया। सुदर्शन पटनायक ने अपने कला कौशल से अक्षय तृतीया के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेत पर उकेरा। उनकी कला में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और अक्षय तृतीया से जुड़ी पौराणिक कथाओं का चित्रण किया गया। रेत की इस कला ने स्थानीय और राष्ट्रीय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, और पुरी बीच पर उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना दिया।
कलाकार ने कहा कि रेत कला सिर्फ दृश्य सौंदर्य ही नहीं बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और समाज को जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया पर रेत कला बनाने का उद्देश्य लोगों को त्योहार की पवित्रता और ऐतिहासिक महत्व से जोड़ना है। दर्शक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस सजीव कला प्रदर्शन का आनंद लिया और कलाकार की कुशलता की सराहना की।
पुरी प्रशासन ने इस अवसर पर कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना और कला के प्रति जागरूकता फैलाना है। अक्षय तृतीया पर रेत कला ने पुरी को न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी आकर्षक बना दिया।
दर्शकों ने कहा कि सुदर्शन पटनायक की रेत कला ने समुद्र के किनारे अक्षय तृतीया का उत्सव और भी रंगीन और जीवंत कर दिया। उन्होंने कला को देखकर पारंपरिक कथाओं और त्योहारों के महत्व को करीब से महसूस किया। इस मौके पर कई लोग रेत कला की तस्वीरें और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे, जिससे यह उत्सव और भी व्यापक रूप में फैल गया।
कलाकार ने अंत में कहा कि रेत कला का यह आयोजन समुद्र, संस्कृति और परंपरा के बीच का एक सुंदर पुल है। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि वे इस कला को समझें और पारंपरिक त्योहारों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में योगदान दें।
अक्षय तृतीया के इस अवसर पर पुरी बीच पर सुदर्शन पटनायक की रेत कला ने न केवल स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आकर्षित किया, बल्कि इस दिन को सांस्कृतिक और कलात्मक दृष्टि से विशेष बना दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि परंपरा, त्योहार और कला मिलकर समाज में सौंदर्य, उत्साह और जागरूकता का संचार कर सकते हैं।
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