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भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को भुवनेश्वर में 7वें ओडिशा ट्रैवल बाजार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से पहुंचे प्रतिनिधियों, निवेशकों, ट्रैवल पार्टनर्स और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा ट्रैवल बाजार राज्य की पर्यटन क्षमता को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के साथ नई साझेदारियां विकसित करने और नए पर्यटन सर्किट तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री माझी ने ओडिशा की प्राकृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां एक तरफ सदियों पुरानी विरासत और आध्यात्मिक केंद्र हैं तो दूसरी तरफ समुद्र तट, झीलें, जंगल और वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
मुख्यमंत्री ने ओडिशा के प्रमुख पर्यटन स्थलों का जिक्र करते हुए पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर और विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर को राज्य की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसके साथ ही उन्होंने धौली का उल्लेख किया, जो इतिहास और शांति के संदेश से जुड़ा प्रमुख स्थल है। इन स्थानों की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान देश-विदेश के पर्यटकों को ओडिशा की ओर आकर्षित करती है।
माझी ने कहा कि ओडिशा के पास करीब 575 किलोमीटर लंबी तटरेखा है, जो समुद्री पर्यटन के विकास के लिए बड़ी संभावना प्रस्तुत करती है। राज्य के समुद्र तटों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं और नए अनुभवों से जोड़कर देश और विदेश के यात्रियों के लिए आकर्षक बनाया जा सकता है। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े निवेशकों और कंपनियों को राज्य में उपलब्ध संभावनाओं पर ध्यान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने भीतरकणिका का भी विशेष रूप से जिक्र किया। यह क्षेत्र अपनी जैव विविधता, मैंग्रोव वन और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह राज्य के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसके अलावा ओडिशा के बड़े हिस्से में फैले जंगल इको-टूरिज्म और नेचर टूरिज्म को आगे बढ़ाने की संभावनाएं प्रदान करते हैं।
चिल्का झील को राज्य की पर्यटन पहचान का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए कई अनूठे स्थल मौजूद हैं। चिल्का झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं।
मुख्यमंत्री ने हीराकुंड बांध का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें नए पर्यटन सर्किट के माध्यम से आपस में जोड़ा जा सकता है। इससे पर्यटकों को एक ही यात्रा में अलग-अलग अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
माझी ने कहा कि ओडिशा की सबसे बड़ी ताकत इसकी पर्यटन विविधता है। यहां विरासत पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, प्रकृति पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म का अनूठा संगम देखने को मिलता है। राज्य सरकार इसी विविधता को पर्यटन क्षेत्र के विकास का आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहती है।
ओडिशा ट्रैवल बाजार का उद्देश्य पर्यटन उद्योग से जुड़े अलग-अलग पक्षों को एक मंच पर लाना भी है। इसमें टूर ऑपरेटर, ट्रैवल कंपनियां, निवेशक और अन्य हितधारक राज्य में मौजूद अवसरों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके माध्यम से व्यावसायिक साझेदारी और पर्यटन पैकेज विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। किसी क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और दूसरी सेवाओं की मांग बढ़ती है। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों और छोटे व्यवसायों को मिल सकता है।
राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जा सकता है। ओडिशा की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, खानपान और लोक परंपराएं पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान कर सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने से स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों के लिए पर्यटन क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन बुनियादी ढांचे को विकसित करने, बेहतर आवास सुविधाएं तैयार करने और नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने की पर्याप्त गुंजाइश है। सरकार पर्यटन क्षेत्र को निवेश और रोजगार के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पहले से मजबूत है, लेकिन इसके साथ एडवेंचर और प्रकृति आधारित पर्यटन के क्षेत्र में भी विस्तार की बड़ी संभावना मौजूद है। लंबी तटरेखा, जंगल, झील और प्राकृतिक क्षेत्रों का उपयोग पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
ओडिशा ट्रैवल बाजार जैसे आयोजन राज्य के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पर्यटन उद्योग के प्रतिनिधियों और ट्रैवल पार्टनर्स के साथ सीधे संवाद से राज्य के लिए नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री माझी ने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से नई साझेदारियां सामने आएंगी और राज्य में नए ट्रैवल सर्किट विकसित करने की दिशा में ठोस पहल होगी। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को ओडिशा के विभिन्न हिस्सों की यात्रा करने और यहां मौजूद निवेश तथा पर्यटन संभावनाओं को करीब से देखने के लिए आमंत्रित किया।
7वें ओडिशा ट्रैवल बाजार के उद्घाटन के साथ राज्य सरकार ने विरासत, आध्यात्मिकता, समुद्र तट, वन्यजीव, प्राकृतिक सौंदर्य और एडवेंचर को एक व्यापक पर्यटन पहचान के रूप में प्रस्तुत किया है। सरकार की कोशिश इस विविधता को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के साथ पर्यटन क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की है।
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