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ओडिशा के आवासीय हॉस्टलों में 15 नाबालिग छात्राएं गर्भवती मिलीं

Kavita2
25 Sept 2026 3:12 PM IST
ओडिशा के आवासीय हॉस्टलों में 15 नाबालिग छात्राएं गर्भवती मिलीं
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भुवनेश्वर। ओडिशा के आवासीय हॉस्टलों में रहने वाली नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। राज्य विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान आवासीय हॉस्टलों में रहने वाली 15 नाबालिग लड़कियां गर्भवती पाई गईं। यह संख्या पिछले शैक्षणिक वर्ष की तुलना में अधिक है। 2024-25 के दौरान राज्य के हॉस्टलों में रहने वाली नौ आदिवासी नाबालिग लड़कियों के गर्भवती पाए जाने की जानकारी दी गई थी।

स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बाहिनीपति के सवाल के जवाब में ये आंकड़े दिए। विधानसभा में सामने आई जानकारी के बाद आवासीय हॉस्टलों में रहने वाली नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी का मुद्दा चर्चा में आ गया है।

सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 शैक्षणिक वर्ष में सबसे अधिक मामले कंधमाल जिले में सामने आए। यहां पांच नाबालिग लड़कियां गर्भवती पाई गईं। इसके बाद कोरापुट में चार मामले दर्ज किए गए।

कंधमाल और कोरापुट के आंकड़ों को मिलाकर ही नौ मामले हो जाते हैं। राज्य में कुल 15 मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों ने आवासीय हॉस्टलों में रहने वाली नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।

पिछले शैक्षणिक वर्ष से तुलना करने पर मामलों में बढ़ोतरी दिखाई देती है। 2024-25 के दौरान राज्य भर के हॉस्टलों में रहने वाली नौ आदिवासी नाबालिग लड़कियां गर्भवती पाई गई थीं। वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 15 हो गई।

इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक शैक्षणिक वर्ष में ऐसे मामलों की संख्या छह बढ़ी है। हालांकि केवल इन आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक मामले की परिस्थितियों या कारणों के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हर मामले में अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती हैं, जिनकी जांच संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के स्तर पर आवश्यक है।

नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने के मामलों में उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकार बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी होता है कि गर्भावस्था किन परिस्थितियों में हुई और क्या किसी प्रकार का यौन अपराध हुआ है। नाबालिग से संबंधित मामलों में उसकी पहचान और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना भी आवश्यक है।

विधानसभा में पेश आंकड़ों में छात्राओं की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। नाबालिगों से जुड़े मामलों में उनकी पहचान उजागर नहीं करना उनकी निजता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

आवासीय हॉस्टल में छात्राएं लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहती हैं। ऐसे में हॉस्टल प्रशासन पर उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल की विशेष जिम्मेदारी होती है। खासकर नाबालिग छात्राओं के मामले में निगरानी और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था आवश्यक होती है।

विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। साथ ही छात्राओं को किसी प्रकार की परेशानी होने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

कंधमाल में पांच और कोरापुट में चार मामले सामने आना इन दोनों जिलों के आंकड़ों को विशेष रूप से उल्लेखनीय बनाता है। हालांकि अन्य छह मामले किन जिलों में सामने आए, इसकी जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार ये मामले 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के दौरान सामने आए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में संख्या बढ़ने के कारण छात्रावासों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत सामने आई है।

नाबालिग छात्राओं से जुड़े ऐसे मामलों में केवल चिकित्सकीय सहायता ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग भी महत्वपूर्ण होता है। प्रभावित बच्चियों की निजता की रक्षा करते हुए उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना संबंधित संस्थानों की जिम्मेदारी होती है।

इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। यदि जांच में किसी नाबालिग के साथ यौन अपराध की बात सामने आती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी होती है। हालांकि विधानसभा में बताए गए आंकड़े केवल गर्भवती पाई गई नाबालिग छात्राओं की संख्या बताते हैं। प्रत्येक मामले में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी के बारे में अलग जांच और साक्ष्य आवश्यक होंगे।

राज्य के आवासीय हॉस्टलों में बड़ी संख्या में छात्राएं शिक्षा प्राप्त करने के लिए रहती हैं। ऐसे संस्थानों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण के साथ शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना होता है। इसलिए वहां किसी नाबालिग के साथ होने वाली गंभीर घटना सीधे संस्थागत सुरक्षा से जुड़े सवाल पैदा करती है।

विधानसभा में सवाल उठाए जाने के बाद अब इन मामलों में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान रहेगा। छात्रावासों में नियमित निगरानी, स्वास्थ्य जांच, छात्राओं के लिए शिकायत तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

छात्राओं को सुरक्षित वातावरण देने के लिए हॉस्टल प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय भी आवश्यक है। किसी छात्रा के व्यवहार या स्वास्थ्य में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर समय रहते आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होता है।

इसके साथ ही छात्राओं को उनके अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत करने के उपलब्ध माध्यमों की जानकारी देना भी जरूरी है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें बच्चियां बिना डर अपनी समस्या जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचा सकें।

2024-25 में नौ मामलों के मुकाबले 2025-26 में 15 मामले सामने आने से यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। आंकड़ों में बढ़ोतरी के पीछे के कारणों को समझने के लिए प्रत्येक मामले की परिस्थितियों का अलग-अलग अध्ययन और जांच आवश्यक होगी।

फिलहाल विधानसभा में स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड की ओर से दिए गए आंकड़ों के बाद आवासीय हॉस्टलों में नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है। कंधमाल में पांच और कोरापुट में चार मामलों सहित राज्य में कुल 15 नाबालिग लड़कियों के गर्भवती पाए जाने की जानकारी दी गई है।

पिछले शैक्षणिक वर्ष में यह संख्या नौ थी। ऐसे में नए आंकड़े नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था और प्रभावित बच्चियों को कानूनी, चिकित्सकीय तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

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