ओडिशा

कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में मिलीं 1,741 गलतियां, 10 अधिकारियों पर कार्रवाई

Kavita2
25 Sept 2026 3:05 PM IST
कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में मिलीं 1,741 गलतियां, 10 अधिकारियों पर कार्रवाई
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भुवनेश्वर। ओडिशा में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई नई पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आई हैं। राज्य के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,741 गलतियां पाई गई हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के पूर्व निदेशक और तीन पूर्व उप-निदेशक भी शामिल हैं, जिन्हें सेवा से निलंबित किया गया है।

मंत्री नित्यानंद गोंड ने विधानसभा में विधायक गौतम बुद्ध दास के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार की गई नई पाठ्यपुस्तकों की जांच में अलग-अलग स्तर पर कुल 1,741 त्रुटियां सामने आईं।

इतनी बड़ी संख्या में गलतियां सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई। इसके आधार पर कुल 10 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

मंत्री के मुताबिक SCERT के एक पूर्व निदेशक और तीन पूर्व उप-निदेशकों को सेवा से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा छह उप-निदेशकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

इस तरह पाठ्यपुस्तकों में मिली त्रुटियों के मामले में कुल 10 अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है। सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और उनसे जुड़ी प्रक्रिया में सामने आई खामियों को गंभीरता से लिया गया है।

कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों की प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार होती हैं। छोटे बच्चों के लिए किताबों में दी गई जानकारी ही विभिन्न विषयों की बुनियादी समझ विकसित करने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में पाठ्यपुस्तकों में बड़ी संख्या में गलतियां मिलना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर विषय माना जा रहा है।

पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करने से लेकर उसकी समीक्षा और अंतिम प्रकाशन तक कई स्तरों पर जांच की प्रक्रिया होती है। इसके बावजूद 1,741 गलतियां सामने आने के बाद इस पूरी प्रक्रिया की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं।

विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी। इससे साफ है कि सरकार ने केवल त्रुटियों की पहचान तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

SCERT शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और शैक्षणिक सामग्री की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इसके पूर्व निदेशक और पूर्व उप-निदेशकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई मामले की गंभीरता को दर्शाती है।

सरकार के अनुसार चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जिनमें एक पूर्व निदेशक और तीन पूर्व उप-निदेशक शामिल हैं। वहीं छह अन्य उप-निदेशकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

हालांकि विधानसभा में दी गई जानकारी में प्रत्येक गलती की अलग-अलग प्रकृति का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि 1,741 त्रुटियों में कितनी भाषाई, तथ्यात्मक, मुद्रण संबंधी या अन्य प्रकार की गलतियां हैं।

इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियों का पाया जाना पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत की ओर संकेत करता है। विशेष रूप से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए तैयार की जाने वाली सामग्री में सटीकता महत्वपूर्ण होती है।

गलत जानकारी बच्चों तक पहुंचने पर उनकी विषय संबंधी समझ प्रभावित हो सकती है। शिक्षक भी पाठ्यपुस्तकों को मुख्य शैक्षणिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसलिए किताबों की सामग्री का प्रकाशन से पहले कई स्तर पर सत्यापन आवश्यक होता है।

मंत्री नित्यानंद गोंड के विधानसभा में दिए जवाब के बाद यह मामला शिक्षा विभाग की जवाबदेही से भी जुड़ गया है। सरकार ने संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करके संकेत दिया है कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी में हुई खामियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

अब इस मामले में शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के परिणाम पर भी नजर रहेगी। छह उप-निदेशकों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई में उनकी जिम्मेदारी और भूमिका की जांच की जाएगी।

वहीं निलंबित किए गए पूर्व निदेशक और तीन पूर्व उप-निदेशकों से संबंधित प्रक्रिया भी विभागीय नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। अंतिम जिम्मेदारी संबंधित जांच और विभागीय कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

नई पाठ्यपुस्तकों में सामने आई त्रुटियां भविष्य में किताबों की तैयारी और समीक्षा की प्रक्रिया में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री तैयार करते समय विषय विशेषज्ञों, भाषा विशेषज्ञों और संपादकीय टीम के स्तर पर प्रभावी जांच महत्वपूर्ण होती है।

खासकर कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए किताबों में भाषा और तथ्यों की शुद्धता जरूरी है। प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बच्चे पुस्तकों में लिखी सामग्री को प्रमाणिक मानकर सीखते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार की गलती उनके सीखने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।

विधानसभा में मामला उठने के बाद सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में यह साफ हुआ कि गलतियों की पहचान की जा चुकी है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू हो गई है।

कुल 10 अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं। इनमें चार अधिकारियों का निलंबन और छह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल है। यह कार्रवाई पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

फिलहाल सरकार के सामने पाठ्यपुस्तकों में मिली गलतियों को सुधारने के साथ यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी है कि आगे विद्यार्थियों तक पहुंचने वाली शैक्षणिक सामग्री त्रुटिरहित हो। इसके लिए संपादन, समीक्षा और अंतिम सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक होगा।

ओडिशा विधानसभा में मंत्री नित्यानंद गोंड की ओर से दी गई जानकारी के बाद कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में मिली 1,741 गलतियों का मामला सामने आया है। सरकार ने मामले में 10 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। अब विभागीय कार्रवाई और भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।

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