ओडिशा

बंगाल की खाड़ी में 15 मछुआरे लापता, ओडिशा के तीन सगे भाई भी शामिल

Kavita2
10 July 2026 9:29 AM IST
बंगाल की खाड़ी में 15 मछुआरे लापता, ओडिशा के तीन सगे भाई भी शामिल
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Odisha ओडिशा: बंगाल की खाड़ी में मछली पकड़ने गए करीब 15 मछुआरों के लापता होने की खबर से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों में चिंता का माहौल है। लापता मछुआरों में ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक के तीन सगे भाई भी शामिल हैं। कई दिनों से ट्रॉलर से कोई संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिजनों की बेचैनी बढ़ गई है। परिवारों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के शंकरपुर फिश लैंडिंग सेंटर से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मछुआरों का एक दल 2 जुलाई को हिल्सा मछली पकड़ने के लिए बंगाल की खाड़ी की ओर रवाना हुआ था। सभी मछुआरे एक मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर पर सवार होकर गहरे समुद्र में गए थे।

लापता तीन भाइयों की पहचान रवींद्र माझी, जगन्नाथ माझी और जयराम माझी के रूप में हुई है। तीनों ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई ब्लॉक स्थित उलुडा गांव के निवासी हैं और मधुसूदन माझी के पुत्र बताए गए हैं। परिवार के अनुसार, तीनों लंबे समय से मछली पकड़ने का काम कर रहे थे और हर वर्ष हिल्सा सीजन के दौरान समुद्र में जाते थे।

शंकरपुर फिशरमैन एसोसिएशन के सचिव एवं पूर्व विधायक स्वदेश रंजन नायक ने बताया कि ट्रॉलर पर सवार मछुआरों का 4 जुलाई तक ट्रॉलर मालिक और परिवार के सदस्यों से नियमित संपर्क बना हुआ था। इसके बाद अचानक सभी तरह का संपर्क टूट गया और तब से ट्रॉलर से कोई सूचना नहीं मिल पाई है।

उन्होंने बताया कि लगातार संपर्क स्थापित करने की कोशिशें की गईं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। इससे आशंका बढ़ गई है कि ट्रॉलर किसी गंभीर समुद्री संकट में फंस गया हो सकता है।

चिंता की बात यह भी है कि ट्रॉलर में जीपीएस (GPS) प्रणाली लगी होने के बावजूद उसकी वर्तमान लोकेशन का पता नहीं चल पाया है। इससे खोज अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। संबंधित एजेंसियां तकनीकी माध्यमों से ट्रॉलर का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

इस बीच मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी ने भी मामले को और गंभीर बना दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए निम्न दबाव के क्षेत्र (लो-प्रेशर सिस्टम) के कारण भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में खराब मौसम की चेतावनी जारी की थी। विभाग ने गहरे समुद्र में मौजूद मछुआरों को सैटेलाइट फोन के माध्यम से तट पर लौटने की सलाह भी दी थी।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लापता ट्रॉलर पर सवार चालक दल को यह चेतावनी समय पर मिली थी या नहीं। यदि चेतावनी उन तक नहीं पहुंची, तो खराब मौसम के बीच उनके समुद्र में फंसने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

लापता मछुआरों के परिवारों की चिंता हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जा रही है। परिजन लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर रहे हैं तथा जल्द से जल्द खोज अभियान तेज करने की मांग कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई ठोस जानकारी नहीं मिलने से वे मानसिक तनाव में हैं।

ओडिशा के तीनों लापता भाइयों के परिजनों ने राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि भारतीय तटरक्षक बल, नौसेना और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से व्यापक खोज एवं बचाव अभियान चलाया जाए, ताकि लापता मछुआरों का जल्द पता लगाया जा सके।

स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से समुद्री खोज अभियान में तेजी लाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय बीतने के साथ बचाव अभियान और कठिन होता जाता है, इसलिए हर संभव संसाधन का तत्काल उपयोग किया जाना चाहिए।

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में मौसम अचानक बदल सकता है। ऐसे समय में मछुआरों के लिए मौसम संबंधी चेतावनियों का समय पर मिलना और उनका पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है। आधुनिक संचार व्यवस्था, जीपीएस ट्रैकिंग और सैटेलाइट संचार प्रणाली ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

फिलहाल संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां लापता ट्रॉलर और उस पर सवार मछुआरों का पता लगाने के प्रयास में जुटी हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं की गई है। खोज अभियान जारी है और परिवारों को उम्मीद है कि जल्द ही उनके प्रियजनों के बारे में कोई सकारात्मक जानकारी मिलेगी।

इस घटना ने एक बार फिर समुद्र में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा, मौसम संबंधी चेतावनी प्रणाली और आपातकालीन संचार व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। अब सभी की निगाहें बचाव एजेंसियों की कार्रवाई और लापता मछुआरों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद पर टिकी हुई हैं।

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