मिज़ोरम

मिजोरम में छात्रों का प्रदर्शन तेज भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग

Ratna Netam
10 Aug 2026 4:31 PM IST
मिजोरम में छात्रों का प्रदर्शन तेज भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग
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आइजॉल : परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर मिजोरम में भी छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को प्रभावशाली छात्र संगठन मिजो जिरलाई पॉल (MZP) के सैकड़ों सदस्यों ने मिजोरम लोक सेवा आयोग (MPSC) के आइजॉल स्थित कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आयोग के कार्यालय का घेराव करते हुए प्रशासनिक और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। अधिकारियों के कार्यालय में प्रवेश करने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। हालांकि, स्थिति को जल्द ही नियंत्रित कर लिया गया।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी सामने आ रही है। झारखंड में भी सोमवार को हजारों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में विधानसभा की ओर मार्च किया। वहां प्रदर्शनकारी लंबे समय से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। इसी बीच मिजोरम में MPSC की भर्ती प्रक्रिया को लेकर MZP ने मोर्चा खोल दिया है।
MZP के अध्यक्ष डॉ. सी. लालरेमरुआता ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि जब तक आयोग संगठन की मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाता, तब तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा। छात्र संगठन की सबसे प्रमुख मांगों में वन टाइम रजिस्ट्रेशन यानी OTR सिस्टम को खत्म करना शामिल है। MZP का आरोप है कि मौजूदा OTR पोर्टल उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह सुविधाजनक नहीं है। संगठन का कहना है कि पोर्टल के दिशा-निर्देशों में स्पष्टता की कमी के कारण अभ्यर्थियों को आवेदन प्रक्रिया में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्र संगठन ने मांग की है कि OTR सिस्टम को रद्द करके अलग-अलग पदों के हिसाब से आवेदन करने की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा जिन अभ्यर्थियों के आवेदन अधूरे दस्तावेज अपलोड होने के कारण खारिज किए गए हैं, उन्हें दस्तावेज ऑफलाइन जमा करने का एक बार मौका देने की मांग भी की गई है। MZP का कहना है कि खास तौर पर उन अभ्यर्थियों को राहत मिलनी चाहिए जिन्होंने लिखित परीक्षा पास की, लेकिन बाद में दस्तावेज सत्यापन के दौरान आवेदन से जुड़ी कमियों के कारण अयोग्य घोषित कर दिए गए।
MZP ने आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड जारी किए गए, उन्होंने लिखित परीक्षा में हिस्सा लिया और उन्हें इंटरव्यू तक के लिए बुलाया गया। इसके बाद OTR में दस्तावेज अधूरे होने का हवाला देकर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। छात्र संगठन का कहना है कि यदि पोर्टल या प्रशासनिक प्रक्रिया में कमी है तो उसकी जिम्मेदारी उम्मीदवारों पर नहीं डाली जानी चाहिए।
इसके अलावा MZP ने आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए अतिरिक्त जनशक्ति उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि MPSC की प्रशासनिक क्षमता और भर्ती प्रक्रिया की दक्षता बढ़ाने के लिए जरूरी सुधार किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में उम्मीदवारों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
हालांकि, MPSC अधिकारियों ने छात्र संगठन की मांगों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग ने OTR प्रणाली का बचाव करते हुए इसे पारदर्शी और सुविधाजनक प्रक्रिया बताया है। अधिकारियों के मुताबिक देश के कई अन्य राज्य लोक सेवा आयोगों में भी वन टाइम रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू है। आयोग का कहना है कि OTR के जरिए उम्मीदवारों को बार-बार अपनी व्यक्तिगत जानकारी और दस्तावेज दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे डेटा एंट्री में गलतियों की संभावना कम होती है और उम्मीदवारों को 24 घंटे ऑनलाइन सुविधा मिलती है।
MPSC के अनुसार वर्ष 2025-26 में करीब 50 हजार आवेदन OTR व्यवस्था के तहत प्रोसेस किए गए, जबकि 2026-27 में अब तक 20 हजार से ज्यादा आवेदन प्रक्रिया में आ चुके हैं। आयोग के मुताबिक अधूरे या निर्धारित समय के बाद दस्तावेज अपलोड किए जाने की वजह से करीब 500 उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं। आयोग का यह भी कहना है कि खारिज किए गए आवेदनों से जुड़े कुछ उम्मीदवार पहले ही गौहाटी हाई कोर्ट की आइजॉल बेंच का रुख कर चुके हैं और मामला अदालत में विचाराधीन है।
MPSC अधिकारियों के अनुसार जब मामला न्यायालय के समक्ष लंबित है, तब भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करना उचित नहीं होगा। आयोग का तर्क है कि OTR में ढील देने या मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव करने से उन नियुक्तियों पर भी असर पड़ सकता है जो पहले ही अंतिम रूप से पूरी हो चुकी हैं।
फिलहाल MZP अपनी मांगों पर कायम है और उसने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर आयोग अपनी मौजूदा OTR व्यवस्था को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बता रहा है। ऐसे में छात्रों और आयोग के बीच विवाद का समाधान बातचीत या न्यायिक प्रक्रिया के जरिए निकलने की संभावना है। इस पूरे मामले पर आगे होने वाले निर्णय से मिजोरम में प्रतियोगी परीक्षाओं की भर्ती प्रक्रिया और OTR सिस्टम को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय हो सकती है।
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