मिज़ोरम

मिजोरम में सुपारी किसानों की बढ़ेगी कमाई, गुणवत्ता और प्रसंस्करण पर जोर

Tara Tandi
24 Oct 2026 7:42 PM IST
मिजोरम में सुपारी किसानों की बढ़ेगी कमाई, गुणवत्ता और प्रसंस्करण पर जोर
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मिजोरम: राज्य के भूमि संसाधन, मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री लालथानसांगा ने 23 अक्टूबर को कहा कि सुपारी की खेती में केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देने के बजाय, इसकी गुणवत्ता, बाजार मूल्य और मुनाफे को बेहतर बनाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
लुंगलेई शहर में सुपारी की वैज्ञानिक खेती और कीट प्रबंधन पर आयोजित एक प्रशिक्षण-सह-सेमिनार को संबोधित करते हुए, मंत्री ने कहा कि यह फसल एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल बन गई है और राज्य के हजारों परिवारों के लिए आजीविका का एक बड़ा स्रोत है।
उन्होंने कहा, "केवल फसल उगाना और उसकी पैदावार लेना ही काफी नहीं है। हमें बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार देने वाली फसलें उगाने और उनके लिए अच्छी कीमत सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा। इसके लिए ज्ञान, प्रशिक्षण और नई तकनीकों के बारे में जागरूकता की आवश्यकता है।"
लालथानसांगा ने बताया कि मिजोरम में लगभग 67,380 हेक्टेयर क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है। 2025-26 वित्तीय वर्ष के दौरान यहाँ लगभग 5.12 लाख क्विंटल सुपारी का उत्पादन हुआ। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका के लिए सुपारी के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए। गुणवत्ता, कीमत, विपणन के अवसर और किसानों की आय बढ़ाने को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"
मंत्री ने वैज्ञानिक तरीके से बागान प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया, खासकर इसलिए क्योंकि राज्य के विभिन्न हिस्सों में बीमारियों और कीटों के हमलों से सुपारी के बागानों को नुकसान पहुँचा है।
उन्होंने बीमारियों और कीटों का जल्द पता लगाने, बागानों के उचित प्रबंधन और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के बजाय वैज्ञानिक रूप से अनुशंसित नियंत्रण उपायों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, "अलग-अलग बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग तरीकों की जरूरत होती है। हमें विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की सलाह माननी चाहिए और सही जानकारी तथा उचित अवलोकन के आधार पर निर्णय लेने चाहिए।"
लालथानसांगा ने बताया कि उनका विभाग ICAR-केंद्रीय बागानी फसल अनुसंधान संस्थान (ICAR-Central Plantation Crops Research Institute) और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि सुपारी के बागानों को प्रभावित करने वाली बीमारियों और कीटों की समस्याओं का अध्ययन किया जा सके और उनसे बचाव के उचित उपाय विकसित किए जा सकें।
उन्होंने किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने के लिए फसल कटाई के बाद के प्रबंधन (post-harvest handling) और प्रसंस्करण (processing) को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने बताया कि नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (North Eastern Council) के तहत मिलने वाली फंडिंग से ममित जिले के ज़मुआंग और कोलासिब जिले के चेम्फाई में सुपारी के प्रसंस्करण और सुखाने की सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार मिजोरम में उगाई जाने वाली सुपारी के मूल स्थान की पुष्टि के लिए 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' (उत्पत्ति प्रमाण-पत्र) के मुद्दे पर भी विचार कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कदमों से उपज का बाजार मूल्य बढ़ाने में मदद मिलेगी और इसकी पहचान एक ऐसी सुपारी के रूप में स्थापित होगी, जो वास्तव में मिजोरम में उगाई गई है।
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