
Meghalaya मेघालय: मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले में 5 फरवरी को हुए म्यंसनगाट-थांगस्को ब्लास्ट मामले की जांच के तहत जस्टिस (रिटायर्ड) आर.एस. चौहान की अध्यक्षता वाले ज्यूडिशियल कमीशन ऑफ इन्क्वायरी ने 6 से 8 मई तक शिलांग के स्टेट गेस्ट हाउस में तीन दिवसीय सुनवाई पूरी की। इस हादसे में 33 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई थी, जिनमें अधिकांश असम और नेपाल के रहने वाले थे।
राज्य सरकार ने इस गंभीर घटना के बाद न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था, ताकि ब्लास्ट के कारणों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जांच की जा सके। तीन दिनों की इस सुनवाई में कई विभागों, संगठनों और विशेषज्ञ संस्थानों ने अपने बयान और तथ्य प्रस्तुत किए।
6 मई को आयोग ने प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, हेड ऑफ फॉरेस्ट, सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (रांची), कोयला मंत्रालय और डायरेक्टरेट ऑफ मिनरल रिसोर्सेज, शिलांग के अधिकारियों के बयान दर्ज किए। इस दौरान खनन और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
7 मई को वेस्ट खासी हिल्स के शालंग एरिया ट्रेडर एसोसिएशन और साउथ वेस्ट खासी हिल्स माइन ओनर्स एंड एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने अपने विचार और बयान आयोग के समक्ष रखे। इन संगठनों ने क्षेत्र में खनन गतिविधियों और उससे जुड़े नियमों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
8 मई को अंतिम दिन नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस और हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने अपने इनपुट आयोग को दिए। परिजनों ने घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई।
कमीशन ने बताया कि अगली सुनवाई 13 से 15 जुलाई, 2026 के बीच होगी। इस दौरान 13 जुलाई को जांच के हिस्से के रूप में ब्लास्ट साइट का भी निरीक्षण किया जाएगा, जिससे घटनास्थल की स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।
इस जांच को राज्य में खनन सुरक्षा और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





