
Jharkhand झारखण्ड : जिले के इचाक प्रखंड में लक्ष्मी नारायण मठ की बहुमूल्य भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। मठ के वर्तमान महंत विजयानंद दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखित आवेदन भेजा है, जिसमें उन्होंने अंचल कार्यालय और कथित भूमि माफियाओं की मिलीभगत से मठ की करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।
महंत ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह भूमि, पदाली मौजा की खाता संख्या 283, प्लॉट संख्या 802, लगभग 35 डिसमिल क्षेत्रफल वाली, वर्षों से मठ के नाम पर दर्ज है। उन्होंने कहा कि मठ की संपत्ति को सुरक्षित रखने और अवैध हड़पने की कोशिशों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री को आवेदन भेजा गया है।
विजयानंद दास ने स्पष्ट किया कि उनके मठ की भूमि को लेकर कई बार दबाव बनाया गया और कुछ लोग अंचल कार्यालय में बैठे अधिकारियों के सहयोग से इस भूमि को अपने स्वार्थ के लिए हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मठ का यह क्षेत्र सिर्फ़ धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का नहीं है, बल्कि इसकी आर्थिक वैल्यू करोड़ों में है। यदि यह जमीन गलत हाथों में चली गई तो मठ और स्थानीय समुदाय दोनों को गंभीर नुकसान होगा।"
महंत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन और अंचल कार्यालय को कई बार इस मामले में चेतावनी दी थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
प्रेस वार्ता में महंत विजयानंद दास ने यह भी बताया कि मठ की भूमि पर वर्षों से कई धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह भूमि गलत हाथों में चली गई तो न केवल मठ के अस्तित्व को खतरा होगा, बल्कि स्थानीय जनता के धार्मिक और सामाजिक हित भी प्रभावित होंगे।
महंत ने कहा कि उनका मकसद केवल मठ की संपत्ति की सुरक्षा करना है और कोई भी राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ इसमें शामिल नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से न्याय दिलाने की उम्मीद जताई और कहा कि उम्मीद है कि राज्य सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाएगी।
इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों में भी चिंता पैदा कर दी है। कई लोग मानते हैं कि यदि मठ की भूमि पर अवैध कब्जा होता है तो यह क्षेत्र में कानून और व्यवस्था के लिए भी खतरा बन सकता है।
वर्तमान में, मठ की भूमि विवाद को लेकर स्थानीय समुदाय में भी चर्चा जारी है। लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार निष्पक्ष रूप से मामले की जांच करे और मठ की संपत्ति को सुरक्षित बनाए।
इस मामले ने झारखंड में धार्मिक संस्थाओं की भूमि को लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार इस मामले में कौन से कदम उठाते हैं और मठ की संपत्ति की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।





