झारखंड

Garhwa ; नदी घाटों पर 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा लागू, अवैध बालू खनन पर रोक

Kavita2
11 Jun 2026 1:52 PM IST
Garhwa ;  नदी घाटों पर 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा लागू, अवैध बालू खनन पर रोक
x

Jharkhand झारखण्ड : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के अनुपालन और मानसून के दौरान संभावित जलस्तर वृद्धि, भूमि कटाव तथा अवैध बालू उत्खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका को देखते हुए गढ़वा प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार ने गढ़वा अनुमंडल क्षेत्र के सभी नदी घाटों, जल निकायों और उनके 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध अगले आदेश तक या एनजीटी द्वारा जारी किसी नए निर्देश तक प्रभावी रहेगा, जो भी पहले हो। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान नदियों के किनारे होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस निषेधाज्ञा के दायरे में सोन, कोयल, बांकी, दानरो, यूरिया और सरस्वतिया सहित सभी प्रमुख नदियों के घाट शामिल होंगे, जो सदर अनुमंडल क्षेत्र में स्थित हैं। इन क्षेत्रों में बालू उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ समय से इन नदियों के किनारे अवैध बालू खनन की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से नदियों के किनारों पर कटाव का खतरा और बढ़ जाता है, जिससे आसपास के गांवों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। इसी को देखते हुए यह सख्त निर्णय लिया गया है।

प्रशासन ने यह भी कहा कि कई जगहों पर बिना अनुमति के बालू की खुदाई और उसका परिवहन किया जा रहा था, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था बल्कि सरकारी नियमों का भी उल्लंघन हो रहा था। ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी और जांच टीमों को सक्रिय किया गया है।

निषेधाज्ञा के दौरान किसी भी व्यक्ति या संस्था को नदी घाटों के 200 मीटर दायरे में बालू खनन या उससे संबंधित गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे इस आदेश का पालन करें और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है, ताकि लोग इस प्रतिबंध के उद्देश्य को समझ सकें।

इस कदम को पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Next Story