मणिपुर

मणिपुर में डिप्टी सीएम के आरोपों पर सियासी घमासान, नेमचा किपजेन ने कहा- आरोप बेबुनियाद

Kavita2
4 Sept 2026 10:50 AM IST
मणिपुर में डिप्टी सीएम के आरोपों पर सियासी घमासान, नेमचा किपजेन ने कहा- आरोप बेबुनियाद
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इंफाल। मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच जारी तनाव के बीच राजनीतिक विवाद भी बढ़ता जा रहा है। नागा समुदाय से आने वाले डिप्टी सीएम लोसी डिखो द्वारा साथी डिप्टी सीएम नेमचा किपजेन और उनके पति पर नागा-कुकी संघर्ष को भड़काने का आरोप लगाए जाने के बाद अब किपजेन ने पलटवार किया है। कुकी समुदाय से ताल्लुक रखने वालीं नेमचा किपजेन ने गुरुवार को इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया।

नेमचा किपजेन ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि वह हमेशा शांति, संवाद और लोगों के हित में काम करती रही हैं। किपजेन ने आरोपों को राजनीतिक और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए इन्हें खारिज कर दिया।

मणिपुर में लंबे समय से जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है। राज्य में मैतेई, कुकी और नागा समुदायों के बीच संबंधों को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे समय में सरकार के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

लोसी डिखो ने लगाए थे आरोप

मामले की शुरुआत तब हुई जब मणिपुर के नागा समुदाय से आने वाले डिप्टी सीएम लोसी डिखो ने नेमचा किपजेन और उनके पति पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कुछ गतिविधियों के कारण नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बढ़ा।

डिखो के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई। उनके आरोपों को लेकर कुकी समुदाय से जुड़े नेताओं और समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली।

हालांकि, डिखो के आरोपों को लेकर विस्तृत साक्ष्य या आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, किपजेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

नेमचा किपजेन का पलटवार

नेमचा किपजेन ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप वास्तविकता से दूर हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के संघर्ष को बढ़ावा देने में उनकी कोई भूमिका नहीं रही है।

उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका उद्देश्य समाज में शांति और विकास को बढ़ावा देना है। किपजेन ने यह भी कहा कि ऐसे आरोपों से न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी जा सकता है।

मणिपुर में जातीय तनाव का मुद्दा

मणिपुर पिछले कुछ समय से जातीय हिंसा और तनाव से जूझ रहा है। राज्य में अलग-अलग समुदायों के बीच विश्वास की कमी और राजनीतिक मतभेदों ने स्थिति को जटिल बनाया है।

नागा और कुकी समुदायों के बीच भी कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। ऐसे में नेताओं के बयान अक्सर संवेदनशील स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मणिपुर जैसे संवेदनशील राज्य में जिम्मेदार पदों पर बैठे नेताओं के बीच बयानबाजी का असर सामाजिक माहौल पर पड़ सकता है।

सरकार के भीतर मतभेद की चर्चा

दो डिप्टी सीएम के बीच सामने आए इस विवाद ने सरकार के अंदर समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट की गई है।

राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसा कायम करना और शांति बहाल करना है। ऐसे में सरकार के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद की खबरें चिंता का विषय बन सकती हैं।

शांति और संवाद पर जोर

मणिपुर की स्थिति को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार लगातार शांति बहाली के प्रयासों की बात करती रही हैं। विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से बातचीत और विश्वास बहाली के कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में राजनीतिक नेताओं को संयमित बयान देने और संवाद के रास्ते को मजबूत करने की जरूरत है।

फिलहाल नेमचा किपजेन ने लोसी डिखो के आरोपों को खारिज कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि इस विवाद पर अन्य राजनीतिक दल और राज्य सरकार क्या प्रतिक्रिया देते हैं। मणिपुर में जारी तनाव के बीच यह मामला आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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