मणिपुर

मणिपुर में हत्याकांड के बाद उबाल हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग तेज

Ratna Netam
20 Oct 2026 5:39 PM IST
मणिपुर में हत्याकांड के बाद उबाल हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग तेज
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इंफाल। मणिपुर में एक बार फिर हिंसा और तनाव के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को राज्य के कई हिस्सों में बाजार, दुकानें, शिक्षण संस्थान और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। तीन मेइतेई नागरिकों की हत्या के विरोध में नेटिव पीपल्स कमिटी मणिपुर (NPCM) ने 48 घंटे के राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। वहीं, इरामदम कानबा लुप (IKAL) ने भी 32 घंटे के बंद की घोषणा की। दोनों संगठनों ने हमले के लिए जिम्मेदार सशस्त्र लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बंद का सबसे अधिक असर इंफाल घाटी के जिलों में देखने को मिला, जहां सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित रहीं।
तीन लोगों की हत्या के बाद भड़का आक्रोश
मणिपुर के इंफाल पूर्व और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास खोंगबाल तंगखुल क्षेत्र में सोमवार को हथियारबंद हमलावरों ने लकड़ी इकट्ठा करने गए ग्रामीणों पर गोलीबारी कर दी थी। इस हमले में मेइतेई समुदाय के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए।जानकारी के अनुसार, ग्रामीण जंगल में जलावन की लकड़ी लेने गए थे। इसी दौरान हथियारबंद लोगों ने उन पर अचानक हमला कर दिया।गोलीबारी में दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया और स्थानीय लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पांच घाटी जिलों में बंद का व्यापक असर
48 घंटे के बंद का सबसे अधिक असर इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग जिलों में देखा गया।इन जिलों में अधिकांश दुकानें, बाजार, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सार्वजनिक परिवहन के वाहन सड़कों से नदारद रहे, जबकि कुछ निजी वाहन ही चलते दिखाई दिए।प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों में संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।सोमवार रात कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर भी विरोध जताया।
48 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
NPCM के संयोजक एल. फाओमेई ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से जिम्मेदार लोगों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने की मांग की है।संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार हो रही हिंसक घटनाओं के बावजूद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकी है।NPCM ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों के लोगों को शामिल करते हुए व्यापक आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर हुआ प्रदर्शन
तीन ग्रामीणों की हत्या से नाराज लोगों ने सोमवार को दो मृतकों के शव मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के आधिकारिक आवास के बाहर रखकर विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने सरकार से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया।मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और हमलावरों की तलाश के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए।
IED धमाके में तीन सुरक्षाकर्मी घायल
मणिपुर में हाल की हिंसक घटनाओं के बीच एक आईईडी विस्फोट में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के तीन जवान भी घायल हुए हैं।इसके अलावा थौबल जिले में हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत हुई। राज्य के अन्य हिस्सों में भी सशस्त्र हमलों और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं।लगातार हो रही इन घटनाओं से राज्य में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सुरक्षाबलों ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और तलाशी अभियान तेज कर दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था की गई मजबूत
बंद और हिंसा की घटनाओं को देखते हुए राज्य की राजधानी इंफाल और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह बंद के दौरान किसी नई बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली थी। हालांकि, कई स्थानों पर प्रदर्शन जारी रहे।मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं। हालिया घटनाओं ने राज्य में शांति बहाली की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है।फिलहाल प्रदर्शनकारी संगठनों की मुख्य मांग हमलावरों की गिरफ्तारी, हिंसक गतिविधियों पर रोक और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
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