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Manipur मणिपुर: मणिपुर के Lilong-Urup इलाके में एक सराहनीय पहल के तहत Assam Rifles ने तंपकमयूम असतुल्लाह को उनके लंबे समय से किए जा रहे मानवीय कार्यों के लिए सम्मानित किया है। असतुल्लाह को स्थानीय लोग “वॉटर हीलर” के नाम से जानते हैं, जिन्होंने दशकों से निस्वार्थ सेवा के जरिए कई परिवारों की मदद की है।
असतुल्लाह, जिन्हें प्यार से “एसिंग मैबा” भी कहा जाता है, ने अपनी पहचान उन लोगों को पानी से बाहर निकालने वाले व्यक्ति के रूप में बनाई है जो नदियों, तालाबों या अन्य जल स्रोतों में डूब जाते हैं। उनके इस काम ने उन्हें क्षेत्र में एक विशेष स्थान दिलाया है, जहां लोग उन्हें संकट के समय याद करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी किसी व्यक्ति के डूबने की घटना होती है, तो असतुल्लाह तुरंत मौके पर पहुंचकर खोज और बचाव कार्य में जुट जाते हैं। उन्होंने कई मामलों में पानी में डूबे लोगों के शवों को बाहर निकालकर परिवारों को सौंपा है, जिससे उन्हें अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलती है।
उनकी इस सेवा को केवल एक काम नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण के रूप में देखा जाता है। असतुल्लाह ने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण या संसाधनों के, वर्षों तक यह कार्य जारी रखा है। उनका मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाना और उन्हें मानसिक सुकून देना रहा है।
Assam Rifles द्वारा किया गया यह सम्मान उनके योगदान को पहचान देने का एक प्रयास है। अधिकारियों ने कहा कि असतुल्लाह का कार्य समाज के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाता है कि व्यक्तिगत स्तर पर भी लोग बड़े बदलाव ला सकते हैं।
समारोह के दौरान असम राइफल्स के अधिकारियों ने उनके समर्पण और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में उम्मीद की किरण होते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।
असतुल्लाह ने इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह आगे भी अपने इस काम को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि जब भी किसी परिवार को उनकी जरूरत होगी, वह मदद के लिए तैयार रहेंगे।
मणिपुर में नदियों और जल स्रोतों के पास होने वाली दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या रही हैं। ऐसे में असतुल्लाह जैसे लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, जो बिना किसी डर के कठिन परिस्थितियों में भी काम करते हैं।
स्थानीय समुदाय का कहना है कि असतुल्लाह ने कई परिवारों को उस समय सहारा दिया है जब वे सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उनके प्रयासों ने न केवल राहत दी है, बल्कि समाज में सहयोग और संवेदना की भावना को भी मजबूत किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यों को पहचान मिलना जरूरी है, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर समाज सेवा में योगदान दे सकें। असतुल्लाह का उदाहरण यह दिखाता है कि समर्पण और सेवा भावना से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, तंपकमयूम असतुल्लाह का यह सम्मान उनके वर्षों की निस्वार्थ सेवा की पहचान है। उनका कार्य न केवल मणिपुर, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
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