महाराष्ट्र

धागे की कीमतों में 70% तक उछाल, भिवंडी के पावरलूम उद्योग पर बढ़ा आर्थिक दबाव

Kavita2
23 Sept 2026 10:24 AM IST
धागे की कीमतों में 70% तक उछाल, भिवंडी के पावरलूम उद्योग पर बढ़ा आर्थिक दबाव
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भिवंडी। महाराष्ट्र के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्र भिवंडी में धागे की लगातार बढ़ती कीमतों ने पावरलूम और ग्रे-फैब्रिक उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। व्यापारियों और उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि मार्च से धागे की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। पिछले करीब छह महीनों में कई तरह के धागों की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कच्चे माल की लागत में अचानक आए इस उछाल का सीधा असर कपड़ा उत्पादन से जुड़ी इकाइयों पर पड़ रहा है।

उद्योग से जुड़े कारोबारियों के मुताबिक समस्या केवल धागे की कीमत बढ़ने तक सीमित नहीं है। तैयार कपड़े और ग्रे-फैब्रिक की बिक्री कीमत में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में उत्पादन लागत और बिक्री कीमत के बीच अंतर कम होता जा रहा है। इससे कई पावरलूम संचालकों के लिए अपना मुनाफा बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

छह महीने में धागा 60 से 70 प्रतिशत तक महंगा

व्यापारियों का कहना है कि मार्च के बाद से अलग-अलग प्रकार के धागों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। धागा पावरलूम उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी कीमत में बदलाव सीधे उत्पादन लागत को प्रभावित करता है।

जब धागा महंगा होता है तो कपड़ा तैयार करने की लागत भी बढ़ जाती है। सामान्य परिस्थितियों में बढ़ी हुई लागत को तैयार उत्पाद की कीमत में जोड़कर बाजार से वसूला जाता है, लेकिन भिवंडी के कारोबारियों का कहना है कि मौजूदा समय में तैयार कपड़े की कीमतों में उतनी तेजी नहीं आई है।

इस वजह से उत्पादकों के सामने लागत का अतिरिक्त बोझ खुद उठाने या उत्पादन सीमित करने जैसी स्थिति बन रही है।

पावरलूम सेक्टर पर सीधा असर

भिवंडी की पहचान देश के बड़े पावरलूम केंद्रों में होती है। यहां बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम स्तर की इकाइयां कपड़ा बुनाई से जुड़ी हुई हैं। इनके साथ प्रोसेसिंग, ट्रेडिंग, परिवहन और अन्य सहायक कारोबारों का भी बड़ा नेटवर्क काम करता है।

पावरलूम इकाइयों के लिए धागा सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से एक है। इसलिए इसकी कीमत में तेजी से होने वाली बढ़ोतरी का असर तुरंत उत्पादन पर दिखाई देता है।

उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बड़े कारोबारियों के मुकाबले छोटी इकाइयों के लिए कीमतों में इस तरह के उतार-चढ़ाव को संभालना अधिक कठिन होता है। सीमित पूंजी के कारण उन्हें महंगे कच्चे माल की खरीद में ज्यादा रकम लगानी पड़ती है।

तैयार कपड़े की कीमत नहीं बढ़ने से परेशानी

टेक्सटाइल कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिस तेजी से धागे की कीमत बढ़ी है, उसी अनुपात में तैयार कपड़े की कीमत नहीं बढ़ी। इससे ग्रे-फैब्रिक बनाने वाली इकाइयों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है।

अगर कोई इकाई महंगा धागा खरीदकर कपड़ा तैयार करती है और बाजार में पुराने या मामूली बढ़ी हुई कीमत पर ही उसे बेचना पड़ता है तो उसकी कमाई पर असर पड़ता है। लगातार ऐसी स्थिति बने रहने पर उत्पादन आर्थिक रूप से कठिन हो सकता है।

कारोबारियों का कहना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण वे पूरी बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर भी नहीं डाल सकते। अधिक कीमत मांगने पर ऑर्डर कम होने का जोखिम रहता है।

छोटी इकाइयों के सामने ज्यादा चुनौती

भिवंडी के टेक्सटाइल सेक्टर में बड़ी संख्या में छोटे पावरलूम संचालक काम करते हैं। इनके लिए बिजली, मजदूरी, मशीनों के रखरखाव और अन्य खर्च पहले से उत्पादन लागत का हिस्सा हैं। अब धागे की बढ़ती कीमत ने अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है।

यदि उत्पादन लागत लगातार बढ़ती है और बिक्री से होने वाली आय उसी स्तर पर रहती है तो छोटी इकाइयों के लिए रोजमर्रा का संचालन प्रभावित हो सकता है।

इसके अलावा पावरलूम कारोबार में बड़ी मात्रा में कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है। कच्चा माल महंगा होने से पहले जितनी रकम में निश्चित मात्रा में धागा खरीदा जाता था, अब उसी मात्रा के लिए अधिक पैसा लगाना पड़ रहा है।

पूरी सप्लाई चेन पर असर की आशंका

व्यापारियों को आशंका है कि धागे और तैयार कपड़े की कीमतों के बीच मौजूदा असंतुलन लंबे समय तक जारी रहा तो इसका प्रभाव केवल पावरलूम मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा।

भिवंडी का टेक्सटाइल उद्योग एक लंबी सप्लाई चेन पर आधारित है। इसमें धागा व्यापारी, पावरलूम संचालक, कपड़ा व्यापारी, प्रोसेसिंग यूनिट, डाइंग यूनिट, ट्रांसपोर्टर और श्रमिक सहित कई वर्ग जुड़े हुए हैं।

अगर बुनाई इकाइयों का उत्पादन प्रभावित होता है तो ग्रे-फैब्रिक की उपलब्धता और प्रोसेसिंग इकाइयों के काम पर भी असर पड़ सकता है। इसी तरह कपड़ा व्यापारियों और परिवहन से जुड़े कारोबार पर भी इसका प्रभाव पहुंच सकता है।

रोजगार पर भी पड़ सकता है असर

भिवंडी के पावरलूम और टेक्सटाइल उद्योग से बड़ी संख्या में श्रमिकों की आजीविका जुड़ी हुई है। मशीन संचालन, धागा चढ़ाने, कपड़े की पैकिंग, माल ढुलाई और प्रोसेसिंग जैसे कामों में बड़ी संख्या में लोग रोजगार पाते हैं।

यदि बढ़ती लागत के कारण कुछ इकाइयां उत्पादन घटाती हैं या मशीनों को सीमित समय के लिए चलाती हैं तो इसका असर श्रमिकों के काम पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल बड़े स्तर पर इकाइयों के बंद होने जैसी स्थिति की पुष्टि नहीं है, लेकिन उद्योग से जुड़े लोगों की चिंता लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते अंतर को लेकर है।

भिवंडी का बड़ा टेक्सटाइल नेटवर्क

भिवंडी केवल पावरलूम उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां बुनाई से लेकर कपड़े की खरीद-बिक्री और उससे जुड़ी कई सहायक गतिविधियों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है।

यही वजह है कि कच्चे माल की कीमत में बड़े बदलाव का असर कई स्तरों पर महसूस किया जाता है। धागे की कीमत स्थिर रहने पर पावरलूम संचालकों के लिए उत्पादन लागत और ऑर्डर की कीमत तय करना आसान होता है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कारोबार की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।

कीमतों में संतुलन की उम्मीद

टेक्सटाइल कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब धागे की कीमतों के अगले रुख पर है। यदि कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता आती है या तैयार कपड़े की कीमत बढ़ी हुई लागत के अनुरूप होती है तो पावरलूम इकाइयों को राहत मिल सकती है।

फिलहाल पिछले छह महीनों में कई तरह के धागों की कीमतों में 60 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के दावे ने भिवंडी के टेक्सटाइल उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। यदि यह असंतुलन लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर पावरलूम से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग, ट्रेडिंग, रोजगार और पूरी टेक्सटाइल सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है।

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