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वेनेजुएला के कच्चे तेल पर बढ़ेगा सहयोग? रिलायंस रिफाइनरी पहुंचेंगे मार्को रुबियो
nidhi
21 Oct 2026 7:31 AM IST

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वेनेजुएला के तेल पर होगी अहम चर्चा
जामनगर/मुंबई: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो बुधवार, 21 अक्टूबर को गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनरी परिसर का दौरा करेंगे। इस दौरान कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी के साथ उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। बातचीत में वेनेजुएला से अधिक कच्चा तेल लेकर भारत में उसका प्रसंस्करण करने और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी किसी नए तेल समझौते पर हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह दौरा संभावनाओं और व्यावसायिक बातचीत के स्तर पर है।
रुबियो ने मंगलवार को मुंबई पहुंचने के बाद कहा था कि अमेरिका, रिलायंस के साथ वेनेजुएला के अधिक कच्चे तेल को रिफाइन करने पर बातचीत करेगा। उन्होंने भारत को तेल शोधन की महाशक्ति बताते हुए इसकी तकनीकी क्षमता की सराहना की। उनके मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियां भारी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने में सक्षम हैं और पहले भी ऐसा कर चुकी हैं। वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ने पर भारत उसकी अतिरिक्त आपूर्ति को उपयोगी ईंधन में बदलने में भूमिका निभा सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत केवल तेल खरीद और रिफाइनिंग तक सीमित नहीं रह सकती। वेनेजुएला में रिलायंस की संभावित तेल उत्पादन गतिविधियों के अवसरों पर भी चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले बातचीत हुई है और अब मौजूद अवसरों तथा अड़चनों को समझने की कोशिश होगी। रिलायंस वेनेजुएला के कच्चे तेल की महत्वपूर्ण खरीदार रही है, लेकिन वहां संभावित उत्पादन गतिविधियों को लेकर कोई नई अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है।
जामनगर परिसर इस बातचीत के केंद्र में इसलिए है क्योंकि यहां अलग-अलग किस्म के कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने की क्षमता है। परिसर में रिलायंस की दो बड़ी रिफाइनरियां हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। वेनेजुएला का अत्यधिक भारी कच्चा तेल सामान्य रिफाइनरियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे तेल को संसाधित करने की क्षमता रखने वाले बड़े परिसरों का महत्व आपूर्ति में बदलाव के समय बढ़ जाता है।
रुबियो ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने की जरूरत को भी स्वीकार किया है। उनका कहना है कि किसी देश के लिए अपने तेल आपूर्तिकर्ताओं को अचानक बदलना आसान नहीं होता। उन्होंने भारत के विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा खरीदने के प्रयास को उचित रणनीति बताया। अमेरिका खुद भी भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा स्रोत बनने का इच्छुक है। इसी व्यापक चर्चा में वेनेजुएला सहित अन्य देशों से संभावित आपूर्ति के विकल्पों को देखा जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, वेनेजुएला का अतिरिक्त उत्पादन वैश्विक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि केवल एक देश की आपूर्ति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा होने वाली सभी बाधाओं की भरपाई संभव नहीं होगी। इसलिए यह पहल व्यापक ऊर्जा सहयोग का हिस्सा है। तेल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ उसे रिफाइन करने की पर्याप्त क्षमता भी जरूरी होती है, जिससे बाजार तक उपयोग योग्य ईंधन पहुंच सके।
जामनगर यात्रा से पहले रुबियो ने मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के विषयों पर चर्चा की। जयशंकर और रुबियो ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ त्रिपक्षीय बैठक भी की। इसमें क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्राथमिकताओं पर बातचीत हुई। इस तरह रिलायंस के साथ प्रस्तावित चर्चा, व्यापक राजनयिक बैठकों के बीच हो रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी रुबियो ने आशावाद जताया है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं और कुछ विषयों को अंतिम रूप देना बाकी है। वहीं, जामनगर की बातचीत में रिलायंस की अमेरिका के टेक्सास में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना तथा अमेरिकी ऊर्जा कारोबार से जुड़े अवसरों पर भी नजर रहेगी। फिलहाल बैठक का मुख्य महत्व सहयोग की दिशा स्पष्ट करने में है। तेल की मात्रा, कीमत, निवेश और संभावित अनुबंधों की वास्तविक तस्वीर किसी आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएगी।
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