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मानसून सत्र के दौरान Eknath शिंदे को भेंट की गई बाघ की मूर्ति, विधानसभा में दिखा अनोखा दृश्य

Maharashtra महाराष्ट्र: मानसून सत्र के दौरान सोमवार को राज्य विधानसभा परिसर में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब उपमुख्यमंत्री और बीजेपी प्रमुख एकनाथ शिंदे का स्वागत विशेष अंदाज में किया गया। विधानसभा में प्रवेश करते समय उन्हें गुलमोहर रंग की एक छोटी बाघ की मूर्ति भेंट की गई, जिसने राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा पैदा कर दी।
एकनाथ शिंदे जब विधानसभा परिसर में पहुंचे, तो बीजेपी के कई सदस्यों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने उन्हें विशालकाय रूप से शक्ति और नेतृत्व का संदेश देने के लिए बाघ की मूर्ति भेंट की। यह मूर्ति गुलमोहर रंग की थी और इसे खास तौर पर मानसून सत्र के अवसर पर भेंट किया गया।
विधानसभा परिसर में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह भेंट बीजेपी समर्थकों द्वारा संगठन की ताकत और एकता को दर्शन के प्रतीक के रूप में दी गई थी। बाघ की मूर्ति को साहस, नेतृत्व और उन्नति का प्रतीक माना जाता है, और इसी भावना के साथ यह उपहार दिया गया।
#WATCH | Mumbai | Shiv Sena President & Maharashtra Deputy CM Eknath Shinde was presented with a statue of a 'Tiger' as he entered the State Legislative Assembly today pic.twitter.com/4IgkQsMG9A
— ANI (@ANI) June 22, 2026
इस दौरान बीजेपी के कई सदस्यों को उपमुख्यमंत्री के आसपास मौजूद रहते हुए देखा गया, जहां वे उन्हें सत्र की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे थे। राजनीतिक हलकों में इस घटना को एक औपचारिक स्वागत कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके पीछे राजनीतिक संदेश की भी चर्चा हो रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है और पार्टी समय-समय पर अपने नेताओं के माध्यम से शक्ति और सशक्त एकता का प्रदर्शन करती रही है। ऐसे में विधानसभा परिसर में दिया गया यह चुनौतीपूर्ण उपहार भी उसी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा माना जा रहा है।
सर्वाधिक सत्र की शुरुआत के मौके पर विधानसभा में विभिन्न दलों के नेताओं की पहचान रही और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की संभावना पहुंच रही है। ऐसे माहौल में इस तरह के गतिशील इशारे राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय बनाते हैं।
परिणाम यह है कि राजनीतिक नेताओं को दिए जाने वाले ऐसे चुनौतीपूर्ण उपहार केवल स्वागत का हिस्सा नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से पार्टी अपने संदेश और विचारधारा को भी अप्रत्यक्ष रूप से सामने रखती है। बाघ की मूर्ति को शक्ति और प्रभाव का संकेत माना जाना इस घटना को और अधिक चर्चा में ला रहा है।
हालांकि, इस घटना पर किसी प्रकार का आधिकारिक विवाद सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे एक संकेतात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर परिप्रेक्ष्य देखने को मिल रही हैं, जहां लोग इसे एक औपचारिक स्वागत और राजनीतिक प्रतीकवाद दोनों के रूप में देख रहे हैं।
यदि मानसून सत्र के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा में कई महत्वपूर्ण कार्यों और बहसों की उम्मीद है, और इसी बीच यह छोटी सी घटना भी जिलों में बनी हुई है।





