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मुंबई : अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित दान चोरी को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। शिंदे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते हुए मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
शनिवार को मीडिया से बातचीत करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि जब सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़े कथित मामलों को लेकर सवाल उठे थे, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जांच के आदेश क्यों नहीं दिए। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए जिम्मेदारी निभाना जरूरी होता है और किसी भी धार्मिक संस्था से जुड़े मामले में पारदर्शिता बनाए रखना चाहिए।
सिद्धिविनायक मंदिर मुद्दे पर उठाए सवाल
एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नेता यशवंत किलेदार की ओर से की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था।
शिंदे ने कहा कि उन्होंने सवाल किया था कि जब सिद्धिविनायक मंदिर में कथित गड़बड़ियों की बातें सामने आईं, तब मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उद्धव ठाकरे ने इस मामले की जांच क्यों नहीं कराई।
उन्होंने कहा कि अगर कोई आरोप सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी होती है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राम मंदिर दान विवाद के बीच बयान
यह बयान ऐसे समय आया है जब अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी हो रही है।
एकनाथ शिंदे ने इसी संदर्भ में उद्धव ठाकरे पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोग दूसरे मामलों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान उठे मुद्दों का भी जवाब देना चाहिए।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभाजन के बाद से ही एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट के बीच लगातार बयानबाजी होती रही है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं।
शिंदे गुट का कहना है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान कई मुद्दों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, जबकि उद्धव ठाकरे गुट मौजूदा सरकार पर निशाना साधता रहा है।
उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला
शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उद्धव ठाकरे के पास प्रशासनिक अधिकार थे और वह किसी भी मामले में जांच का आदेश दे सकते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई अनियमितता सामने आई थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और लोगों की आस्था से जुड़े विषयों में पारदर्शिता सबसे जरूरी है।
आगे बढ़ सकता है विवाद
एकनाथ शिंदे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। शिवसेना (UBT) की ओर से इस मुद्दे पर जवाब आने की उम्मीद है।
राम मंदिर दान विवाद और सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़े आरोपों को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीतिक बहस में और जोर पकड़ सकता है।
फिलहाल, एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों को लेकर विपक्ष पर हमला जारी रखेंगे।





